छत्तीसगढ़ में जन्मी पुंगनूर गाय इन दिनों डेयरी सेक्टर में खास चर्चा का विषय बनी हुई है। दुनिया की सबसे छोटी मानी जाने वाली इस नस्ल ने अपने लघु आकार, उच्च दूध-गुणवत्ता और तेज़ी से बढ़ती बाजार मांग के कारण किसानों और पशुपालन विशेषज्ञों का ध्यान तेजी से आकर्षित किया है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल-इनसेमिनेशन तकनीक के माध्यम से इस नस्ल का प्रसार उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, जिससे इसकी संख्या में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की गई है।
पुंगनूर गाय की पहचान सिर्फ उसके छोटे कद तक सीमित नहीं है। वास्तव में इसकी लोकप्रियता का बड़ा कारण इसका प्रीमियम क्वालिटी वाला दूध है, जिसकी कीमत कई स्थानों पर ₹2000 प्रति लीटर तक बताई जाती है। अधिक फैट और पोषक तत्वों से भरपूर यह दूध आयुर्वेद, हेल्थ प्रोडक्ट्स और घी निर्माण उद्योग के लिए एक आकर्षक विकल्प बन गया है। यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार ऊपर जा रही है और किसान इसे उच्च आय वाले मॉडल के रूप में देख रहे हैं।
इस नस्ल की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि पुंगनूर गाय कम चारा, कम पानी और सीमित स्थान में भी बेहतर उत्पादकता दे सकती है। आधुनिक डेयरी खेती के लिए यह एक विशेष लाभ है, खासकर उन किसानों के लिए जिनके पास संसाधन कम हैं या जो छोटे पैमाने पर डेयरी स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी इस नस्ल को पहचान मिल रही है। कई रिपोर्टों में यह सामने आया है कि देश के शीर्ष नेतृत्व, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डेयरी यूनिट्स भी शामिल हैं, में पुंगनूर नस्ल की उपस्थिति देखी गई है। इससे नस्ल की विश्वसनीयता और निवेश-संभावनाएँ और मजबूत होती हैं।



