मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व विधायक कमलनाथ ने चुनाव आयोग में चल रहे गड़बड़ी को लेकर आरोप लगाते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में SIR प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। न फॉर्म उपलब्ध हैं, न सर्वर काम कर रहा है। 55 जिलों में बीएलओ मैदान में भटक रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग की वेबसाइट भी बंद पड़ी है।
तकनीकी खामियों के कारण SIR एप लगातार फेल हो रहा है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि चुनाव आयोग ने बिना पर्याप्त संसाधनों और तकनीकी तैयारी के इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू किया है।
सवाल उठता है — आखिर इतनी हड़बड़ी क्यों? क्या यह प्रक्रिया केवल दिखावे के लिए चलाई जा रही है या इसके पीछे कोई राजनीतिक रणनीति छिपी है?
आरोप लग रहे हैं कि वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाकर सत्ता संतुलन को बचाने की कोशिश की जा रही है। जब तकनीकी ढांचा ही फेल हो चुका है, तो निष्पक्ष और सटीक डेटा जुटाना कैसे संभव है?
चुनाव आयोग की यह कार्यशैली निष्पक्षता से ज्यादा भाजपा की सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में जाती दिख रही है।
“मतदाता सावधान रहें! यह प्रक्रिया निष्पक्षता के नाम पर एक राजनीतिक खेल है।”







