पटना: छठ महापर्व 2025 के मौके पर बिहार में इस बार लोगों की घर वापसी ने इतिहास रच दिया है। रेलवे के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक, 15 से 26 अक्टूबर के बीच करीब 86 लाख यात्रियों ने बिहार आने के लिए ट्रेन टिकट बुक किए, जिनमें 45 लाख बुकिंग अकेले दिल्ली रूट से दर्ज की गईं।
यह आँकड़ा केवल रेलवे टिकटों का है — इसमें बस, फ्लाइट और निजी वाहनों से लौटने वाले लोगों का डेटा शामिल नहीं है। परिवहन विभाग के अनुसार, इस बार लगभग 1 करोड़ से अधिक प्रवासी बिहारी अपने गांव लौटे हैं, ताकि अपने परिवार के साथ छठ महापर्व मना सकें।
छठ की आस्था और प्रवास का जुड़ाव:
छठ बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा लोकपर्व है। हर साल की तरह, इस बार भी प्रवासी बिहारी चाहे दिल्ली, मुंबई, गुजरात या विदेशों में हों, अपने गांव लौटने की परंपरा निभा रहे हैं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को संभालने के लिए इस बार 1200 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं। कई रूट्स पर सीटें भर जाने के बावजूद यात्रियों का उत्साह कम नहीं हुआ।

बिहार के स्टेशनों पर जबरदस्त भीड़:
पटना, मुज़फ़्फ़रपुर, दरभंगा, छपरा, बक्सर, गया, आरा और भागलपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है।
रेलवे और राज्य प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती, भीड़ नियंत्रण और यात्रियों के मार्गदर्शन की व्यवस्था की है।
प्रशासन की तैयारी:
भीड़ को देखते हुए पटना जंक्शन, राजेंद्र नगर, दानापुर और गया जैसे स्टेशनों पर प्रशासन ने कई सुविधाएं बढ़ाई हैं —
- अतिरिक्त टिकट काउंटर खोले गए
- फ्री वाई-फाई और पेयजल की व्यवस्था
- रीयल-टाइम भीड़ मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया
इन सभी कदमों का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव देना है।
विशेषज्ञों की राय:
समाजशास्त्रियों के मुताबिक, छठ महापर्व सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन चुका है।
हर साल बढ़ती घर-वापसी की संख्या यह साबित करती है कि छठ पर्व बिहारियों के लिए अपनों से मिलने और परंपरा निभाने का उत्सव बन गया है।







