रायपुर। जल जीवन मिशन में एक बार फिर पेमेंट को लेकर विवाद गहराने लगा है। विभाग द्वारा पूरे प्रदेश के लिए 181 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है, लेकिन चर्चा यह है कि यह राशि केवल मल्टी विलेज प्रोजेक्ट के ठेकेदारों को ही दी जा रही है। वहीं, सिंगल विलेज प्रोजेक्ट के ठेकेदारों के भुगतान को रोक दिया गया है।
इस निर्णय को लेकर विभाग के भीतर बड़े स्तर पर असंतोष देखा जा रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि जल जीवन मिशन के अधिकारी जानबूझकर मल्टी विलेज प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा सके।
पेमेंट लॉक, 1500 करोड़ से अधिक राशि अटकी
सूत्रों के अनुसार, जल जीवन मिशन के अंतर्गत प्रदेशभर में लगभग 1500 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। इसके बावजूद विभाग ने केवल 181 करोड़ रुपये ही जारी किए हैं। यह पहली बार है जब छत्तीसगढ़ राज्य गठन (25 वर्षों) के बाद जल जीवन मिशन के तहत ठेकेदारों का भुगतान इस तरह रोका गया है।
कई जिलों के पेमेंट लॉक कर दिए जाने से छोटे और मध्यम ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा है।
एडिशनल MD पर भी उठे सवाल
विभागीय सूत्रों ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में जल जीवन मिशन के एडिशनल एमडी भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ठेकेदारों का आरोप है कि उच्च अधिकारी और एडिशनल एमडी की जानकारी में ही यह चयनात्मक भुगतान किया जा रहा है।
समाचार के लिए एडिशनल एमडी से फोन पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। भुगतान विवाद पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
वहीं, मंत्री भी इन अधिकारियों के सामने बेबस नजर आ रहे हैं, जिससे विभागीय पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
ठेकेदारों में नाराजगी और चर्चा तेज
प्रदेशभर के ठेकेदारों में इस फैसले को लेकर कड़ी नाराजगी है। वे इसे “बड़े ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की रणनीति” बता रहे हैं। ठेकेदारों का कहना है कि जब सभी का काम पूरा हो चुका है तो भुगतान भी समान रूप से होना चाहिए।
जल जीवन मिशन के तहत यह विवाद अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। ठेकेदारों ने मांग की है कि पेमेंट प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और सिंगल विलेज प्रोजेक्ट्स के ठेकेदारों का भी भुगतान शीघ्र किया जाए।






