भाजपा ने जताया अपने पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा, अगड़ा और वैश्य समाज को 64% टिकट

Madhya Bharat Desk
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पटना।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा ने एक बार फिर अपने पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा जताया है। पार्टी ने अपने कोटे की 101 सीटों में से 64 सीटें अगड़ा वर्ग और वैश्य समाज को दी हैं। साथ ही कुशवाहा बिरादरी को भी सात टिकट देकर इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है।

भाजपा लंबे समय से कुशवाहा समाज को अपने कोर वोट बैंक में शामिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी क्रम में सम्राट चौधरी को पहले प्रदेश अध्यक्ष और बाद में उपमुख्यमंत्री बनाकर इस बिरादरी में उनका राजनीतिक कद बढ़ाया गया। अब पार्टी ने इस समुदाय से सात उम्मीदवार उतारकर संदेश दिया है कि वह पिछड़े वर्गों की भागीदारी को लेकर गंभीर है।

अति पिछड़ा वर्ग को मिला प्रतिनिधित्व

भाजपा ने अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को भी 10 सीटें देकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। वहीं महिलाओं को भी पिछले चुनाव की तरह इस बार फिर 13 टिकट दिए गए हैं। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा की 9 और जदयू की 6 महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।

गौरतलब है कि भाजपा ने इस बार भी किसी मुसलमान उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है, जबकि सहयोगी दल जदयू ने 4 मुस्लिम उम्मीदवारों को मौका दिया है।

अगड़ा और वैश्य समाज को प्राथमिकता

पार्टी के टिकट वितरण में अगड़ा वर्ग को सबसे ज्यादा 49 सीटें दी गई हैं — जिनमें राजपूत 21, भूमिहार 16, ब्राह्मण 11 और कायस्थ 1 उम्मीदवार शामिल हैं। वैश्य समुदाय को 15 टिकट देकर पार्टी ने अपने आर्थिक और सामाजिक समर्थन आधार को मजबूत बनाए रखने का संकेत दिया है।

दल बदलने वालों पर भी बरसी कृपा

विश्वास मत के दौरान राजद का साथ छोड़कर एनडीए सरकार का समर्थन करने वाले भरत बिंद और संगीता कुमारी को टिकट देकर भाजपा ने उन्हें राजनीतिक इनाम दिया है।

यादव बिरादरी की भरपाई जदयू से

इस बार भाजपा ने यादव बिरादरी के केवल 6 उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जबकि पिछली बार यह संख्या 15 थी। हालांकि, गठबंधन में जदयू ने 8 यादव उम्मीदवारों को टिकट देकर इस वर्ग की हिस्सेदारी बनाए रखने का प्रयास किया है। इससे भाजपा ने संदेश दिया है कि एनडीए का उद्देश्य सभी वर्गों तक पहुंच बनाना है।

भाजपा का टिकट वितरण साफ संकेत देता है कि पार्टी बिहार चुनाव 2025 में अपने पारंपरिक वोट बैंक पर ही मुख्य भरोसा जता रही है। अगड़ा, वैश्य और कुशवाहा वर्गों को प्राथमिकता देकर भाजपा ने स्पष्ट किया है कि उसका फोकस सामाजिक समीकरण को स्थिर रखने और अपने मजबूत आधार को बनाए रखने पर है।

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