सीबीआई ने एक बड़े ठगी मामले में दिल्ली के राजेंद्र नगर निवासी पी. रामाराव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि रामाराव ने तीन अवसरों पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का अधिकारी बताकर विभिन्न संस्थानों से लाभ हासिल करने की कोशिश की।
पुलिस और जांच अधिकारियों के ब्यान के अनुसार, यह मामला पीएमओ के सहायक निदेशक की शिकायत पर शुरू हुआ। शिकायत में कहा गया कि रामाराव ने पहले पुणे की सिंबायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति को फोन कर खुद को पीएमओ अधिकारी बताकर किसी को एमबीए में प्रवेश दिलाने का झांसा दिया।
दूसरे मामले में, उसने एक फर्जी पत्र तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (तेलंगाना / आंध्र प्रदेश) को भेजने का मामला सामने आया। उस पत्र में उसने कहा कि वह पीएमओ का उप सचिव है और 10 मई को 10 लोगों के लिए तीन एसी डबल बेड रूम की व्यवस्था करना चाहता है, ताकि वे श्री वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन कर सकें।
तीसरे प्रकरण में, सी. श्रीधर नाम के व्यक्ति ने खुद को पीएमओ का संयुक्त सचिव बताकर मैसूरू तहसीलदार को पत्र लिखा। उसमें उसने सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड की 1,023 एकड़ ज़मीन के रिकॉर्ड की मांग की, जिसे प्रवर्तन निदेशालय ने जब्त किया था। जांच में पाया गया कि इस पत्र में उपयोग किया गया मोबाइल नंबर वही है जो रामाराव ने सिंबायोसिस मामले में उपयोग किया था।
सीबीआई ने इस पूरे प्रकरण को धोखाधड़ी, जालसाजी और पहचान को छुपाकर धोखा देने के आरोपों के तहत आगे बढ़ाया है। जांच जारी है और आरोपी से और बिंदु-वार पूछताछ की जाएगी।







