रायपुर, छत्तीसगढ़: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (JJM) योजना छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ चुकी है। गांवों तक नल से शुद्ध पेयजल पहुँचाने का मिशन, अब अधिकारियों और प्रभावशाली ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण लगभग ठप पड़ गया है।
10% कमीशन न देने पर भुगतान ठप
सिंगल विलेज योजना के तहत काम पूरा करने वाले सैकड़ों छोटे ठेकेदारों का भुगतान लंबे समय से रुका हुआ है। ठेकेदारों का आरोप है कि मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक खुलेआम कमीशन की मांग की जा रही है, जिसकी दरें 7% से बढ़कर 10% के पार पहुँच चुकी हैं। कमीशन न देने पर ‘तकनीकी खामियों’ का बहाना बनाकर भुगतान रोका जा रहा है, जिससे ठेकेदार त्रस्त हैं।
इस ‘वित्तीय आतंकवाद’ के चलते रायपुर, महासमुंद, बेमेतरा, धमतरी, और गरियाबंद समेत कई जिलों में नल जल योजना का काम रुका हुआ है, जिसका सीधा खामियाजा ग्रामीण जनता भुगत रही है।
मुख्यालय पर एडिशनल MD की भूमिका संदिग्ध
ठेकेदारों ने जल जीवन मिशन मुख्यालय, रायपुर में अफसरशाही की मनमानी को भ्रष्टाचार की जड़ बताया है। उनका सीधा आरोप है कि एडिशनल MD का पद, जो ENC स्तर के वरिष्ठ अधिकारी के लिए निर्धारित है, उस पर एक कनिष्ठ अधिकारी को बिठाकर विभाग चलाया जा रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि इन्हीं की देखरेख में कमीशनखोरी का पूरा तंत्र मजबूत हुआ है।
केंद्रीय जांच एजेंसियों तक पहुंची शिकायत
विभागीय मनमानी और कमीशनखोरी से त्रस्त ठेकेदारों ने कई बार हड़ताल की, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। अब, पीड़ितों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी (प्रवर्तन निदेशालय), आयकर विभाग, और सीबीआई जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों को शिकायत भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर ब्लैकमनी तैयार कर उसकी बंदरबांट की जा रही है। जल जीवन मिशन अब छत्तीसगढ़ में शुद्ध पेयजल की क्रांति के बजाय, भ्रष्टाचार की मिसाल बनता जा रहा है। मामले में जांच और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि केंद्र की यह महत्वपूर्ण योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक न जाए।







