गरियाबंद:विकास के वादों के बावजूद हकीकत कुछ और ही है। गरियाबंद जिले के अमलीपदर क्षेत्र में स्कूली बच्चे आज भी अपनी जान हथेली पर रखकर शिक्षा पाने को मजबूर हैं। 2020 में 7 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला पुल चार साल बाद भी अधूरा पड़ा है। इसकी वजह से बच्चों को रोज़ उफनती नदी पार करनी पड़ती है।
खतरे से भरा स्कूल का सफर
स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चे कंधे पर बस्ता लेकर नदी का तेज बहाव पैदल ही पार करते हैं। जरा सी लापरवाही या पानी का दबाव बढ़ने पर बड़ा हादसा हो सकता है। बरसात में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। कई बार बच्चों को मजबूरन पढ़ाई छोड़ घर पर ही रुकना पड़ता है।
अधर में 7 करोड़ का प्रोजेक्ट
ग्रामीणों के मुताबिक 2020 में इस पुल के लिए 7 करोड़ का बजट पास हुआ था। बावजूद इसके काम या तो शुरू ही नहीं हुआ या फिर बेहद धीमी रफ्तार से चल रहा है। शासन-प्रशासन की लापरवाही ने बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
लोगों का कहना है कि आखिर कब तक बच्चों की ज़िंदगी खतरे में डाली जाएगी? बजट पास होने के बाद भी अगर पुल पूरा नहीं हुआ तो यह प्रशासन की नाकामी नहीं तो और क्या है? ग्रामीणों की मांग है कि पुल का काम तुरंत पूरा किया जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित शिक्षा मिल सके।







