रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तब और तेज हो गई जब प्रदेश के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने अपनी ही भाजपा सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कंवर ने प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन को नोटिस भेजते हुए साफ लिखा है कि अगर तीन दिनों के भीतर कोरबा कलेक्टर अजित बसंत का तबादला नहीं किया गया तो वे शासन और प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठने को बाध्य होंगे।
ननकीराम कंवर ने कलेक्टर अजित बसंत को हिटलर प्रशासक करार देते हुए कहा कि उनके संरक्षण में कोरबा जिले में भ्रष्टाचार, सत्ता का दुरुपयोग और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का सिलसिला लगातार जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री निवास में तैनात एक सचिव का संरक्षण उन्हें प्राप्त है, जिसके चलते प्रशासनिक अनियमितताओं पर सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। कंवर ने कहा कि मेरे द्वारा शिकायत करने के बाद मेरे कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से टारगेट किया जा रहा है। कनकी में एक कार्यकर्ता की निजी जमीन पर बने बाउंड्रीवाल और पेट्रोल पंप को तोड़ दिया गया, एक कार्यकर्ता की राइस मिल सील कर दी गई, वहीं बरसात के दिनों में एक वरिष्ठ पत्रकार का घर तोड़वाकर उनके घरेलू सामान को जब्त कर लिया गया।




पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि अजित बसंत के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर घोटाले और गड़बड़ियां सामने आई हैं। 40,000 स्व-सहायता समूह की महिलाओं से अरबों रुपये की ठगी हुई लेकिन किसी को भी न्याय नहीं मिला। मालगांव और रलिया में करोड़ों रुपये का फर्जी मुआवजा बांटा गया जबकि वास्तविक भूविस्थापितों को उनके अधिकार से वंचित कर निजी बाउंसर और पुलिस की मदद से घर और जमीन खाली करवा लिए गए। उन्होंने कहा कि डीएमएफ के करोड़ों रुपये मुआवजा वितरण के नाम पर अवैध रूप से खर्च किए गए, बालको कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए करीब 29 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए गए। कोरबा जिले में रेत चोरी और राखड़ परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है, वहीं टोल प्लाजा मदनपुर में उनकी पत्नी की गाड़ी रोके जाने की घटना पर स्थानीय कर्मचारियों को जेल भेजवा दिया गया।
ननकीराम कंवर ने कहा कि मैंने कांग्रेस शासनकाल में पीएससी घोटाला, कोयला घोटाला, डीएमएफ घोटाला, शराब घोटाला, सीजीएमएससी दवाई खरीदी घोटाला, महादेव सट्टा ऐप घोटाला, जल जीवन मिशन घोटाला समेत कई भ्रष्टाचारों को उजागर किया और उनकी शिकायत केंद्र सरकार से की, जिसके बाद केंद्र की एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की। इसी कारण भ्रष्टाचार विरोधी नीति को आधार बनाकर भाजपा की सरकार बनी थी, लेकिन आज उसी सरकार में भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिल रहा है। राज्य सरकार ने मेरी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की जबकि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव, खनिज सचिव और खनिज विभाग के संचालक को जांच का पत्र भेजा है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि स्पष्ट है कि अजित बसंत जैसे कलेक्टर को सरकार का संरक्षण प्राप्त है और अगर तीन दिनों के भीतर उनका तबादला नहीं किया गया तो मैं सरकार और प्रशासन के खिलाफ धरना दूँगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। कंवर ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री, भाजपा संगठन, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय और पुलिस मुख्यालय रायपुर को नोटिस भेजकर अवगत करा दिया है।







