बिलासपुर/तखतपुर।छत्तीसगढ़ सरकार भले ही राज्य को “जीरो पावर स्टेट” बताकर गर्व कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल उलट है। तखतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में डॉक्टरों को बिजली न होने की स्थिति में टॉर्च की रोशनी में बच्चे की डिलीवरी करनी पड़ी।
स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल
राज्यभर में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति लगातार सवालों के घेरे में है।
- गर्भवती महिलाओं को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पा रही है।
- छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन (CGMSC) द्वारा सप्लाई की जा रही दवाइयों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जांच और रिपोर्ट के लिए 8-10 दिन तक इंतज़ार करना पड़ रहा है।
- टीबी और एड्स जैसे गंभीर मरीजों की जांच व उपचार भी प्रभावित हो रहा है।
सरकार के दावों पर उठ रहे सवाल
राज्य सरकार का दावा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। लेकिन तखतपुर CHC से लेकर बड़े अस्पतालों तक की तस्वीर इसके उलट नज़र आ रही है।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि बिजली संकट, एम्बुलेंस की कमी और घटिया दवाओं की सप्लाई की वजह से उन्हें गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती है बल्कि सरकार के “जीरो पावर स्टेट” के दावे पर भी सवालिया निशान लगाती है।







