सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक आदेश सुनाते हुए आदिवासी महिलाओं को पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार दे दिया है। अदालत ने साफ किया कि अब आदिवासी समाज में भी स्त्री और पुरुष के बीच भेदभाव मान्य नहीं होगा।
यह फैसला न केवल क़ानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि सदियों से चली आ रही परंपराओं में भी बदलाव की दिशा दिखाता है। आदिवासी समाज में महिलाओं की भूमिका और स्थिति को लेकर यह निर्णय नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
समाज पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से आदिवासी महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें परिवार व समाज में समान सम्मान मिलेगा। यह कदम न केवल महिलाओं की स्वतंत्रता को बढ़ाएगा बल्कि पारिवारिक और सामाजिक ढांचे में भी बड़े बदलाव की आहट लेकर आएगा।
हालांकि कई आदिवासी समुदायों में इस आदेश को लेकर बहस भी शुरू हो गई है। परंपरागत ढांचे को मानने वाले इसे चुनौतीपूर्ण बता रहे हैं, वहीं समाज सुधारक इसे “महिला सशक्तिकरण” की ऐतिहासिक जीत मान रहे हैं।






