अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई अलास्का वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी।
ट्रंप ने फिलहाल भारत समेत रूसी तेल के आयातकों पर टैरिफ लगाने की आवश्यकता से इनकार कर दिया है।
पुतिन की रणनीतिक जीत
वार्ता में ट्रंप ने रूस पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन पुतिन अपनी शर्तों पर अड़े रहे। नतीजतन वार्ता टूटने से बच गई और पुतिन को एक बड़ी कूटनीतिक जीत मिल गई।
ट्रंप की उम्मीदों पर पानी
ट्रंप चाहते थे कि इस वार्ता से उन्हें युद्ध विराम का रास्ता मिले, ताकि वे अपने चुनावी वादे को पूरा कर सकें और नोबेल शांति पुरस्कार की दावेदारी भी मजबूत कर सकें। लेकिन नतीजा उल्टा हुआ—वार्ता बेनतीजा रही और यह ट्रंप के लिए बड़ी राजनीतिक हार साबित हुई।
यूरोप और ज़ेलेंस्की के लिए झटका
यह असफल वार्ता सिर्फ ट्रंप ही नहीं बल्कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और यूरोपीय संघ के लिए भी झटका है। वे सभी मिलकर भी पुतिन को झुकाने में नाकाम रहे।
पुतिन का मास्को दांव
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुतिन ने अगली वार्ता मास्को में आयोजित करने का प्रस्ताव रख दिया। ट्रंप इसके लिए सहमत हो गए, जिससे अब ज़ेलेंस्की के लिए हालात और कठिन हो सकते हैं, क्योंकि उनका मास्को जाना लगभग असंभव है।







