छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) एक बार फिर दवाओं की गुणवत्ता को लेकर विवादों में है। हाल ही में रायपुर जिले में 48 हजार भरे मटमैले पैरासिटामोल टैबलेट सप्लाई करने का मामला सामने आया, जिन्हें अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों को देने के बजाय वेयर हाउस वापस भेज दिया। यह सप्लाई ऑनलाइन मांग पत्र के विरुद्ध की गई थी, जिससे चिकित्सा अधिकारियों ने आपत्ति जताई।
जानकारी के अनुसार, कंपनी ने 500 एमजी की पैरासिटामोल टैबलेट्स भेजी थीं, जिनका रंग और बनावट संदिग्ध थी। दवा के बैच नंबर और निर्माण तिथि स्पष्ट रूप से पैक पर अंकित होने के बावजूद इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठे। यह भी बताया जा रहा है कि इस बैच की वैधता 31 दिसंबर 2025 तक है, लेकिन अस्पतालों में इसका उपयोग रोक दिया गया।

मामले की गंभीरता इस कारण और बढ़ गई क्योंकि पिछले दो महीनों में 7 से अधिक दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के भीतर यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्यों जांच रिपोर्ट आने से पहले ही इस तरह की दवाएं सप्लाई की जा रही हैं। सीएमएचओ और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे तत्काल वापस करने के आदेश दिए।
मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले भी अस्पतालों से संदिग्ध दवाओं की वापसी की गई है, लेकिन बार-बार हो रही इस तरह की घटनाएं दवा आपूर्ति तंत्र पर सवाल खड़े कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पैरासिटामोल सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली सामान्य दवाओं में से एक है, और इसकी गुणवत्ता में लापरवाही सीधे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है।







