छत्तीसगढ़ राज्य के हजारों शिक्षकों के लिए 7 अगस्त 2025 को एक ऐतिहासिक और राहत भरी खबर सामने आई। बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि शिक्षा विभाग में संविलियन से पहले की सेवा को भी पदोन्नति (प्रमोशन) के लिए मान्यता दी जाएगी। यह फैसला लंबे समय से प्रमोशन से वंचित शिक्षकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।
मुख्य विवरण:
हाईकोर्ट के इस फैसले का सीधा लाभ प्रदेश के लगभग 1.5 लाख शिक्षकों को मिलेगा। ये वे शिक्षक हैं जो वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे थे। इस फैसले से उनकी वर्षों की मेहनत और सेवा को आखिरकार मान्यता मिली है।
यह ऐतिहासिक फैसला महासमुंद जिले के सहायक शिक्षक (एलबी) साजिद खान कुरैशी और 36 अन्य शिक्षकों की याचिका पर सुनाया गया। इन शिक्षकों की नियुक्ति 2001 से 2005 के बीच पंचायत शिक्षकों के रूप में हुई थी और 2018 में उनका संविलियन कर शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक (एलबी) के रूप में कर दिया गया था।
नियमों की स्थिति:
शासकीय नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को 10 वर्ष की सेवा पर पहली और 20 वर्ष की सेवा पर दूसरी पदोन्नति दी जाती है। लेकिन जब इन शिक्षकों ने पदोन्नति की मांग की, तो जनपद पंचायत ने उनकी पूर्व सेवा को मान्यता नहीं दी। इसी को लेकर न्यायालय में मामला पहुंचा।







