“क्या कालीचरण के श्राप ने बदला छत्तीसगढ़ का सियासी नक्शा?”

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों एक रहस्यमय बहस का विषय बनी हुई है — क्या वाकई संत कालीचरण का शाप काम कर रहा है? रायपुर की गलियों से लेकर चाय की दुकानों तक, हर जगह यह चर्चा आम हो गई है कि “जिसने संत को छेड़ा, उसका बुरा हाल हुआ।” धर्म संसद के मंच से संत कालीचरण द्वारा दिए गए विवादित बयान और उनकी गिरफ्तारी के बाद एक चेतावनी दी गई थी: “जो मुझे फंसाएगा, वह खुद फंसेगा।” यह बात उस समय अंधविश्वास मानी गई, लेकिन वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम कुछ और ही संकेत दे रहा है।

घटनाओं की कड़ियाँ और गिरते चेहरे

2022 में धर्म संसद में दिए गए संत कालीचरण के बयान के बाद कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे की शिकायत पर संत को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से कांग्रेस और भूपेश बघेल खेमे से जुड़े कई चेहरे एक-एक कर विवादों में घिरते गए।

प्रमोद दुबे, कभी रायपुर के ताकतवर महापौर, अब टिकट से बाहर और पत्नी भी महापौर की दौड़ से दूर।

अनवर ढेबर शराब घोटाले में जेल में हैं।

अनिल टुटेजा, जिनका कभी प्रशासन में दबदबा था, अब जांच एजेंसियों के घेरे में हैं।

सौम्या चौरसिया, सीएम बघेल की भरोसेमंद अफसर, भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार।

चैतन्य बघेल, खुद पूर्व सीएम का बेटा, कानून के शिकंजे में।

खुद भूपेश बघेल, जिन पर अब जांच एजेंसियों की नजर है।

क्या चुनावी हार भी शाप का हिस्सा है?

रायपुर दक्षिण और पश्चिम में कांग्रेस की अप्रत्याशित हार ने भी चर्चाओं को और हवा दी है। यह भी चर्चा है कि विकास उपाध्याय की जगह अगली बार टिकट के लिए सुबोध हरित

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