सुकमा।राज्य के सुकमा जिले के कारीगुंडम गांव में अंधविश्वास की एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक 48 वर्षीय महिला मड़कम भीमे की सांप के डसने से मौत हो गई। दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि परिजनों ने समय रहते अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और ओझा पर भरोसा किया, जिसके चलते महिला की जान नहीं बच सकी।
रात में हुआ सांप का हमला
घटना बीती रात करीब 1 बजे की है, जब मड़कम भीमे अपने घर में सो रही थीं। उसी दौरान एक जहरीले करैत सांप ने उन्हें डस लिया। परिजनों को जानकारी मिलते ही उन्होंने उसे अस्पताल पहुंचाने की बजाय ओझा बुलाकर झाड़-फूंक कराना शुरू कर दिया।
झाड़-फूंक में बीती रात, नहीं मिला उपचार
गांव के ओझा ने पूरी रात महिला पर झाड़ू और टोना-टोटका किया, मगर स्थिति बिगड़ती गई। कई घंटे गुजरने के बावजूद महिला की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। यह कीमती समय यूं ही व्यर्थ हो गया।
देर से पहुंची अस्पताल, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
सुबह करीब 6 बजे जब महिला की हालत बेहद गंभीर हो गई, तब परिजनों ने उसे निजी वाहन से दोरनापाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए सुकमा जिला अस्पताल भेज दिया गया।
चिकित्सकों की चेतावनी
डॉक्टरों का कहना है कि यदि महिला को समय रहते अस्पताल लाया गया होता, तो उसकी जान बच सकती थी। सांप के काटने पर एंटी-वेनम इंजेक्शन समय पर दिया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।
अंधविश्वास से जान को खतरा
यह घटना ग्रामीण अंचलों में आज भी फैले अंधविश्वास की भयावह सच्चाई को उजागर करती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर बहुत सीमित दिखाई देता है।
क्या होनी चाहिए अगली पहल?
- स्वास्थ्य जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाना।
- झाड़-फूंक के बजाय चिकित्सा उपचार को प्राथमिकता देना।
- स्थानीय प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।







