भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकोनॉमी’ कहने वाले दावों को देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और विशाल कल्याणकारी योजनाएं पूरी तरह से खारिज करती हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत 80 करोड़ से अधिक गरीब लोगों को मुफ्त राशन प्रदान करने की भारत की क्षमता, उसकी मजबूत आर्थिक नींव और राजकोषीय सुदृढ़ता का स्पष्ट प्रमाण है।
PMGKAY: एक अभूतपूर्व पहल
दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक, PMGKAY, लगभग 80 करोड़ लोगों को हर महीने 5 किलोग्राम मुफ्त गेहूं या चावल और 1 किलोग्राम दाल प्रदान करती है । कोविड-19 महामारी के दौरान 26 मार्च, 2020 को शुरू हुई यह योजना गरीबों के लिए जीवनरेखा साबित हुई और इसे दिसंबर 2028 या 2029 तक बढ़ाया गया है। अप्रैल 2020 से दिसंबर 2022 तक इस पर लगभग ₹3.91 लाख करोड़ खर्च हुए, और जनवरी 2024 से दिसंबर 2028 तक ₹11.80 लाख करोड़ का अनुमान है । अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी इस योजना की सराहना करते हुए कहा है कि इसने 2020 में भारत में अत्यधिक गरीबी को केवल 0.8% तक सीमित करने में मदद की । इसके अतिरिक्त, 1 जून, 2025 से पात्र राशन कार्ड धारकों को प्रति माह ₹1000 की वित्तीय सहायता भी मिलेगी।

आर्थिक संकेतक: विकास की कहानी
‘डेड इकोनॉमी’ के दावे के विपरीत, भारत के प्रमुख आर्थिक संकेतक एक मजबूत और लचीली तस्वीर पेश करते हैं:
- GDP वृद्धि: वित्त वर्ष 2022-23 में भारत की GDP 7.2% बढ़ी , और वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 6.4% अनुमानित है । फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 7.2% वृद्धि का अनुमान लगाया है । भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है ।
- मुद्रास्फीति: मार्च 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) घटकर 3.34% हो गई, जो छह वर्षों में सबसे कम है । हालांकि, खाद्य मुद्रास्फीति (CFPI) वित्त वर्ष 25 (अप्रैल-दिसंबर) में 8.4% रही ।
- बेरोजगारी दर: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर 2017-18 में 6.0% से घटकर 2023-24 में 3.2% हो गई । जून 2025 में समग्र बेरोजगारी दर 5.6% रही ।
- विदेशी मुद्रा भंडार: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत है, जो जुलाई 18, 2025 तक $695.489 बिलियन था । सितंबर 2024 में यह $704.885 बिलियन के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): वित्त वर्ष 2025 के पहले आठ महीनों में सकल FDI प्रवाह में 17.9% की वृद्धि हुई, जो $55.6 बिलियन तक पहुंच गया
- क्रेडिट रेटिंग: फिच रेटिंग्स ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को ‘BBB-‘ पर ‘स्थिर’ दृष्टिकोण के साथ बनाए रखा है, जो देश की मजबूत विकास संभावनाओं को दर्शाता है
भारत की अर्थव्यवस्था एक गतिशील और बढ़ती हुई इकाई है। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन प्रदान करने की क्षमता आर्थिक संकट का नहीं, बल्कि देश की अंतर्निहित शक्ति और सामाजिक कल्याण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। चुनौतियों के बावजूद, सरकार के सक्रिय नीतिगत उपाय और संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान देश को निरंतर वृद्धि और समृद्धि के लिए तैयार करते हैं।







