“जाति जनगणना न कराना मेरी सबसे बड़ी भूल थी, अब सुधार करूंगा: राहुल गांधी का बड़ा ऐलान”

Madhya Bharat Desk
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दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘ओबीसी नेतृत्व भागीदारी न्याय सम्मेलन’ में राहुल गांधी ने ऐतिहासिक बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि कांग्रेस की सरकार में रहते हुए जाति आधारित जनगणना न कराना उनकी बड़ी गलती रही है।

राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें अब समझ में आ गया है कि पिछड़ा वर्ग किन वास्तविक समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने मंच से कहा – “ओबीसी की चुनौतियाँ मेरी समझ से बाहर थीं, और यह मेरी कमी थी। मैं अब इसे सुधारने के लिए प्रतिबद्ध हूं।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें पहले ओबीसी वर्ग की समस्याओं की गंभीरता का एहसास होता, तो वे उसी वक्त जातिगत जनगणना करा चुके होते।

मोदी सरकार पर तीखा हमला

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि, “प्रधानमंत्री एक मीडिया निर्मित छवि हैं, असल में उनमें कोई दम नहीं है। मैंने खुद उनके साथ बैठकें की हैं, और मैं दावे के साथ कहता हूं कि वह केवल दिखावा हैं।”

तेलंगाना मॉडल का हवाला

तेलंगाना में हुई हालिया जाति जनगणना का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि 21वीं सदी डेटा आधारित शासन की है। उन्होंने बताया कि अब राज्य सरकार के पास यह डेटा मौजूद है कि किन कंपनियों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों का कितना प्रतिनिधित्व है।

आंकड़ों में 90% आबादी लेकिन भागीदारी नहीं

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि देश की कुल आबादी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों से आता है, लेकिन बजट निर्माण जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों में इनकी भागीदारी नगण्य है। उन्होंने कहा – “हलवा बनाने वाले आप लोग हैं, लेकिन खाने वाले कोई और हैं।”

वोटर लिस्ट और एसआईआर पर खरगे का बयान

सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एसआईआर नीति का विस्तार अब बिहार तक ही नहीं बल्कि पूरे देश में किया जा रहा है। यह भाजपा-आरएसएस की रणनीति है, जिससे गरीब, ओबीसी, एससी/एसटी वर्गों और महिलाओं के मताधिकार को प्रभावित किया जा सके।

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