“खटिया पर किसान, कुर्सी पर मंत्री — खेत में असली मेहनत कौन कर रहा है?”

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

छत्तीसगढ़ की राजनीति अब खेतों तक पहुंच चुकी है — लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग खेत में प्रचार बो रहे हैं, और कुछ पेट पालने के लिए धान।

महिला और बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की खेत में कुर्सी पर बैठकर रोपा लगाने वाली तस्वीर जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुई, लोगों ने सवालों की बौछार कर दी। अब उसी विवाद के बीच एक नई तस्वीर ने इंटरनेट का मूड ही बदल दिया है — जिसमें एक गांव का किसान खटिया को खेत में डालकर उस पर बैठकर रोपा लगा रहा है।

यह तस्वीर न सिर्फ हास्यास्पद है, बल्कि व्यंग्य की धार से भरी हुई है। किसान ने सिर पर थहरा सजाया है, खटिया को खेत में जमा दिया है, और उसी पर टिक कर रोपा लगा रहा है — जैसे कह रहा हो:

“मंत्री जी कुर्सी लाईं? तो हम खटिया लेकर आए हैं… पर हमारा कैमरा पेट है, फोटोशूट नहीं।”

इस जुगाड़ को देख लोग सोशल मीडिया पर कह रहे हैं कि यह किसान नहीं, एक ‘व्यंग्य कलाकार’ है, जिसने बिना बोले सत्ता पर तंज कस दिया।

  • मंत्री जी के लिए खेत में साफ-सुथरी कुर्सी, कैमरा सेटअप और बिल्कुल परफेक्ट एंगल था।
  • वहीं किसान के पास खटिया है, पीठ की थकान है, और खेत कीचड़ से भरा है।
  • एक तरफ फोटो खिंचवाने की कोशिश, दूसरी तरफ फसल उगाने की जद्दोजहद।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जनता अब प्रचार और परिश्रम के फर्क को पहचानने लगी है। कुर्सी पर बैठकर रोपा लगाने की नाटकीयता और खटिया पर बैठकर असल मेहनत करने की तुलना अब जनता के बीच सीधा सवाल बन चुकी है —

“क्या खेत अब कैमरे की पृष्ठभूमि बनेंगे या किसान की जिंदगी का आधार रहेंगे?”

इस तस्वीर ने मंत्रीजी की फोटो को आइना दिखा दिया है — जहाँ एक तरफ नौटंकी है, वहीं दूसरी तरफ खटिया की सच्चाई है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment