नई दिल्ली:
मधुमेह (डायबिटीज) एक ऐसी स्थिति है जो शरीर की कई कार्यप्रणालियों को प्रभावित करती है। विशेष रूप से, इसमें घावों का देर से भरना एक सामान्य लेकिन चिंताजनक संकेत माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में मामूली चोट भी महीनों तक ठीक नहीं होती और कई बार यह घाव संक्रमण का रूप लेकर गंभीर हो सकता है।

डायबिटीज के मरीजों में घाव भरने में देरी क्यों होती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब शरीर में ग्लूकोज का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो यह शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को प्रभावित करता है। वरिष्ठ डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. अल्तमश शेख बताते हैं कि हाई ब्लड शुगर से सफेद रक्त कोशिकाएं (WBCs) कमजोर हो जाती हैं जिससे संक्रमण से लड़ने की ताकत घट जाती है और घाव जल्दी नहीं भर पाते।

डॉ. शेख के अनुसार, मधुमेह शरीर की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (capillaries) को नुकसान पहुंचाता है, जिससे प्रभावित स्थान तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बाधित होती है। इससे नई कोशिकाएं बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और घाव भरने में काफी वक्त लग जाता है।
इम्युनिटी और ब्लड सर्कुलेशन पर असर
डायबिटीज के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है। नतीजतन, घाव वाली जगह पर बैक्टीरियल या फंगल संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा, पैरों में डायबिटिक फुट जैसी जटिल स्थिति भी देखी जाती है, जिसमें अल्सर बनने लगता है और गंभीर मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ सकती है।

जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन (2019) की एक रिपोर्ट बताती है कि डायबिटीज से प्रभावित व्यक्तियों में WBC की प्रभावशीलता 40-50% तक कम हो जाती है, जिससे शरीर संक्रमण से लड़ने में असफल हो जाता है।

कैसे बचाव करें?
डॉ. शेख कहते हैं कि ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखना सबसे जरूरी उपाय है। साथ ही, पैरों और त्वचा की नियमित जांच, किसी भी प्रकार की चोट को नजरअंदाज न करना और समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।



