रायपुर: छत्तीसगढ़ में हुए कथित शराब घोटाले की परतें जितनी खुल रही हैं, उतनी ही चौंकाने वाली सच्चाई सामने आ रही है. पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस घोटाले की रकम ₹2,100 करोड़ बताई थी, लेकिन राज्य की एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में यह आंकड़ा बढ़कर ₹3,200 करोड़ तक पहुंच गया है. आबकारी विभाग के विश्वसनीय सूत्रों ने दावा है कि यदि निष्पक्ष और गहन जांच की जाए, तो यह घोटाला 50,000 करोड़ से भी ज्यादा का हो सकता है. सूत्रों ने बताया कि यह “सिर्फ दस्तावेजों का खेल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित लूट” है, जो भारत के इतिहास का सबसे बड़ा शराब घोटाला है.
घोटाले की बढ़ती रकम
EOW की जांच से यह भी सामने आया है कि छत्तीसगढ़ में हुआ शराब घोटाला ₹2,100 करोड़ का नहीं, बल्कि लगभग ₹3,200 करोड़ का है. और अब मध्यभारत परिदृश्य को आबकारी विभाग के विश्वसनीय सूत्रों बताया कि यदि निष्पक्ष और गहन जांच की जाए, तो यह घोटाला 50,000 करोड़ से भी ज्यादा का हो सकता है. उन्होंने बताया कि यह सिर्फ कागजों का खेल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित लूट है. अभी और कई परते खुलनी बाकी हैं.
आबकारी अधिकारियों पर गिरी गाज
छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग ने इस घोटाले में शामिल 22 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. EOW के चालान से पता चला था कि ये सभी अधिकारी इस ₹2,100 करोड़ के शराब घोटाले के सिंडिकेट का हिस्सा थे.
अनवर ढेबर को भारी कमीशन
जांच में यह खुलासा हुआ है कि सिंडिकेट के मुख्य कारोबारी अनवर ढेबर को कमीशन के तौर पर ₹90 करोड़ से अधिक मिले. उसे शराब डिस्टलरीज से कमीशन और ‘बी पार्ट’ की शराब बिक्री से मिलने वाले पैसों का 15 प्रतिशत मिलता था. ढेबर ने इन पैसों को अपने रिश्तेदारों और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के नाम पर विभिन्न कंपनियों में निवेश किया. उसके करीबी विकास अग्रवाल और सुब्बू शराब दुकानों से पैसे इकट्ठा करने का काम करते थे.
अधिकारियों की संलिप्तता
EOW की जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे घोटाले में बड़े अधिकारियों और नेताओं के अलावा कई जिलों के आबकारी अधिकारी भी शामिल थे. सिंडिकेट के साथ मिलीभगत कर इन 22 आबकारी अधिकारियों को करीब ₹88 करोड़ मिले थे. इन सभी अधिकारियों के नाम EOW ने अपने चालान में शामिल किए हैं, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया.
कानूनी कार्रवाई
बेमेतरा जिले के आबकारी अधिकारी प्रमोद कुमार नेताम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए EOW स्पेशल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई है, जिस पर 14 जुलाई को सुनवाई होगी.
क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच ED और EOW/ACB अलग-अलग कर रही हैं. ED की जांच से पता चला कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के दौरान, आबकारी मंत्री कवासी लखमा, IAS अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर और अरविंद सिंह ने मिलकर एक सिंडिकेट बनाया.
इस सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ की आबकारी नीति में बदलाव किए ताकि कुछ चुनिंदा शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाया जा सके. इसके अलावा, शराब की बोतलों पर नकली होलोग्राम का इस्तेमाल कर आबकारी विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया, जिससे इस सिंडिकेट ने भारी कमीशन कमाया. इस मामले में कवासी लखमा, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और अरविंद सिंह सहित कई अधिकारी वर्तमान में जेल में हैं.







