विनायक एडवरटाइजिंग को झटका, शाला प्रवेश उत्सव का टेंडर नहीं मिला, मध्य भारत की खबर का बड़ा असर

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सरकार तो बना ली है, लेकिन सरकारी ठेकों और विज्ञापन कार्यों में अब भी पिछली कांग्रेस सरकार से जुड़े लोगों का दबदबा बना हुआ है। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं और निचले स्तर के नेताओं में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। मध्य भारत परिदृश्य ने विनायक एडवरटाइजिंग को लेकर खबर का प्रकाशन किया था, जिस पर बड़ा असर हुआ है। स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से सलाह प्रवेश उत्सव को लेकर विनायक एडवरटाइजिंग को करीब 80 लाख का टेंडर मिलना था, जिससे खबर के प्रकाशन के बाद रद्द कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के आलाअधिकारियों ने बताया कि यह टेंडर अलग-अलग एजेंसियों को सौंपा गया है। खास बात यह है कि टेंडर को लेकर बकायदा नोटसीट चली, लेकिन आखिरी समय में अधिकारियों ने विनायक एडवरटाइजिंग को पूरा काम देने से मना कर दिया। सरकार और भाजपा के आला नेताओं के दबाव में यह फैसला लिया गया।खबर विशेष सूत्रों से जानकारी मिली है।

मध्य भारत परिदृश्य द्वारा प्रकाशित खबर जिसका असर देखने को मिला है

सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेताओं ने संगठन स्तर पर शिकायत की है कि कांग्रेस सरकार में नजदीकी रखने वालों को अब भी लाभ मिल रहा है, जबकि भाजपा के मेहनती कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

विनायक एडवरटाइजिंग के संचालक पंकज चंद्राकर हैं। वे कांग्रेस के पूर्व विधायक बैजनाथ चंद्राकर के बेटे हैं। बैजनाथ चंद्राकर कांग्रेस शासनकाल में अपैक्स बैंक के चेयरमैन भी रहे थे।

आरोप है कि इस कंपनी को एलईडी स्क्रीन पर सरकारी विज्ञापन कार्यों में सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले दिनों अंबिकापुर में हुए ‘मोर आवास मोर अधिकार’ कार्यक्रम में लाखों रुपये की ब्रांडिंग का काम भी इसी कंपनी को सौंपा गया था।

कहा जा रहा है कि कांग्रेस सरकार के दौरान इस कंपनी को करोड़ों रुपये के ठेके मिले थे और अब भाजपा सरकार में भी उसी संबंध और प्रभाव की बदौलत इसे लगातार कार्य दिए जा रहे हैं। इससे पार्टी के भीतर असंतोष का माहौल है, और यह सवाल उठने लगा है कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद लाभ की व्यवस्था वही पुरानी क्यों है?

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