मध्यप्रदेश में बच्चों में कुपोषण की स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि राज्य में बच्चों के पोषण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने सरकार पर सीधा हमला बोला है और इसे प्रदेश के भविष्य के लिए “बहुत बड़ा खतरा” बताया है।
स्थिति की गंभीरता:
प्रदेश के 55 में से 45 जिलों में बच्चों में कम वजन और कुपोषण के मामले सामने आए हैं, जिन्हें रेड ज़ोन में रखा गया है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, 4895 करोड़ रुपए का बजट कुपोषण से निपटने के लिए तय किया गया है, फिर भी जमीनी हकीकत चिंताजनक है।
जिला-वार आंकड़े:
भोपाल: 27% बच्चे गंभीर कुपोषण से पीड़ित
इंदौर: 45% बच्चे कुपोषण की श्रेणी में
उज्जैन: 46% बच्चों की हालत चिंताजनक
ग्वालियर-चंबल: करीब 35% बच्चे कुपोषण के शिकार
प्रदेश की कुल 97,000 आंगनबाड़ियों में से लगभग 38% बच्चों की स्थिति कमजोर पाई गई है।
कमलनाथ का बयान:
कमलनाथ ने इस पूरे मामले पर सरकार को घेरते हुए कहा:
> “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतना बड़ा बजट होने के बावजूद प्रदेश में लाखों बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इससे साफ होता है कि या तो यह पैसा खुर्द-बुर्द किया जा रहा है या फिर इसमें भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें हैं। मैं सरकार से मांग करता हूं कि इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और हर बच्चे को समुचित पोषण आहार उपलब्ध कराया जाए।”
उन्होंने आगे कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य ही राज्य के भविष्य की नींव है। अगर बच्चे ही स्वस्थ नहीं होंगे, तो प्रदेश की प्रगति संभव नहीं।



