समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हाल ही में आजमगढ़ में अपना नया आवास तैयार कराया। गृह प्रवेश के अवसर पर उन्होंने विशेष रूप से काशी के प्रतिष्ठित ब्राह्मणों को आमंत्रित किया था, जिससे समारोह को पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ सम्पन्न किया जा सके।
हालांकि, यह आयोजन एक विवाद में तब बदल गया जब काशी से आमंत्रित ब्राह्मणों ने कार्यक्रम में आने से इनकार कर दिया। उन्होंने मीडिया के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि अखिलेश यादव ब्राह्मणों से नफरत करते हैं और उनकी छवि खराब करने के लिए षड्यंत्र रचते हैं। इस कथन ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी।
यह स्थिति अखिलेश यादव के लिए असमंजसपूर्ण हो गई। एक ओर उन्हें पूजा-पाठ कर गृह प्रवेश की आवश्यकता थी, वहीं दूसरी ओर उन्हीं ब्राह्मणों से संबंध बिगड़े हुए थे जिन्हें उन्होंने बुलाया था। भारतीय परंपरा में विधिवत गृह प्रवेश बिना पूजा के अधूरा माना जाता है और किसी प्रकार की धार्मिक त्रुटि को अशुभ संकेत माना जाता है।
सूत्रों के अनुसार, अंततः अखिलेश यादव और उनके परिवार को नजदीकी स्थानीय ब्राह्मणों से विनम्रता से आग्रह करना पड़ा। कहा जाता है कि उन्होंने हाथ जोड़कर, सम्मानपूर्वक निवेदन किया, जिसके बाद स्थानीय पुजारियों ने पूजा संपन्न कराई और गृह प्रवेश सम्पन्न हुआ।







