सार
जुलाई के महीने में हिन्दू पंचांग के कई शुभ पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें से गुरु पूर्णिमा सबसे प्रमुख और पूज्य तिथि मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरु के प्रति सम्मान, भक्ति और कृतज्ञता प्रकट करते हैं। गुरु को भगवान के समान दर्जा दिया गया है, और यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा एक आध्यात्मिक रूप से अत्यंत पावन अवसर होता है।
विस्तार
गुरु पूर्णिमा का पर्व न केवल भक्ति भाव से भरा होता है बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, चेतना और सकारात्मक दिशा भी प्रदान करता है। इस दिन गुरु के चरणों में व्रत, पूजन, ध्यान और सेवा का विशेष महत्व होता है।

गुरु पूर्णिमा 2025 की तिथि व दिन:
हिंदू पंचांग के अनुसार जुलाई 2025 में पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जुलाई की रात 1:36 बजे होगी और इसका समापन 11 जुलाई की रात 2:06 बजे होगा।
इस कारण गुरु पूर्णिमा का पर्व 10 जुलाई 2025 (गुरुवार) को मनाया जाएगा।

पूजन के लिए शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat):
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 बजे से 12:54 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 बजे से 03:40 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:21 बजे से 07:41 बजे तक
- अमृत काल: रात 12:55 बजे से 02:35 बजे तक (11 जुलाई)

गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व:
गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, यह गुरु-शिष्य परंपरा की अमूल्य धरोहर का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने सप्तऋषियों को योग का पहला उपदेश दिया था, जिससे वे पहले गुरु यानी ‘आदियोगी’ कहे गए।

साथ ही यह दिन महर्षि वेदव्यास के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इसी कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन वेदों के संकलक वेदव्यास को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है, जिनकी शिक्षाओं से धर्म और ज्ञान का विस्तार हुआ।







