सार
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मानसूनी कहर ने सराज घाटी को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। थुनाग और आसपास के क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश, बादल फटने और भारी भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
विस्तार
सराज विधानसभा क्षेत्र के थुनाग बाजार में 150 से ज्यादा घर और दुकानें पूरी तरह ढह चुकी हैं, जबकि जरोल बाजार समेत कई गांव बर्बादी की चपेट में आ चुके हैं। जंजैहली समेत कई क्षेत्रों का भूगोल ही बदल गया है। सभी संपर्क मार्ग, पुल और बुनियादी ढांचा ध्वस्त हो गया है, जिससे पूरा इलाका बाहरी दुनिया से कट गया है।
लोग कर रहे खुले आसमान के नीचे जीवन यापन
संचार सुविधाएं पूरी तरह ठप हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है। लोग टेंट और छत के बिना खुले में रहने को मजबूर हैं। अस्पताल, स्कूल और अन्य सरकारी इमारतें भी इस आपदा की चपेट में आ गई हैं। प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और ग्रामीण राहत कार्यों में जुटे हैं, लेकिन पैदल ही पहुंचना संभव हो पा रहा है।

खाद्यान्न और पानी का संकट गहराया
आपदा के तीसरे दिन तक भी थुनाग और जंजैहली क्षेत्र की लगभग 80 हजार की आबादी भूख और प्यास से जूझ रही है। 38 पंचायतें, जैसे कि पखरैर, जरोल, पांडवशीला, चिउणी आदि पूरी तरह प्रभावित हैं। राशन की आपूर्ति रुक गई है और पेयजल योजनाएं नष्ट हो चुकी हैं। ग्रामीण वर्षा जल एकत्र कर जीवन यापन कर रहे हैं।
नेटवर्क और बिजली बंद, प्रशासनिक लापरवाही उजागर
मोबाइल टावरों के बंद होने से संचार ठप है। चार दिन से बिजली नहीं है और कई गांवों का मुख्यालयों से कोई संपर्क नहीं रह गया है। जंजैहली और थुनाग में कंट्रोल रूम भी निष्क्रिय हो गए हैं। सड़कें लापता हैं और राहत का कोई संकेत नहीं मिल रहा।

प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया से लोग नाराज़
सरोआ पंचायत के उपप्रधान ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे हैं, सिर्फ पटवारी ने निरीक्षण किया। लोगों को न राशन मिला, न टेंट और न कोई फौरी राहत। जिले में केवल 5 राहत कैंप बनाए गए हैं जहां 357 लोगों को ठहराया गया है।

जयराम ठाकुर बोले – अब तक की सबसे भयंकर तबाही
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि यह सराज की अब तक की सबसे भयावह आपदा है। राहत कार्यों की धीमी रफ्तार से लोगों की परेशानियां बढ़ रही हैं। उन्होंने सरकार से फौरी मदद, हवाई सर्वेक्षण और सेना की तैनाती की मांग की।

स्थाठी गांव में 20 घर तबाह, लोगों के पास जमीन तक नहीं बची
स्थाठी गांव में भूस्खलन ने 20 घर तबाह कर दिए हैं। 61 लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। प्रभावितों ने मुख्यमंत्री से जमीन उपलब्ध करवाने की मांग की, जिस पर सरकार ने मदद का आश्वासन दिया है।



