भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े करीब 250 टन लौह स्क्रैप की कथित चोरी के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य सरकार से अनुमति मिलने के बाद CBI ने इस प्रकरण की गहन जांच के लिए 35 सदस्यों की विशेष टीम बनाई है। यह टीम स्क्रैप की अवैध निकासी, परिवहन, दस्तावेजी व्यवस्था और संभावित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल करेगी।
रिपोर्टों के मुताबिक जांच दल में दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, चार डीएसपी स्तर के अधिकारी और चार महिला पुलिस निरीक्षक शामिल हैं। जांच को अधिक निष्पक्ष और गोपनीय रखने के लिए स्थानीय CBI इकाई के अधिकारियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। टीम अब पुलिस द्वारा बरामद सामग्री, रिकॉर्ड और अन्य सबूतों का विस्तृत विश्लेषण करेगी।
यह मामला 26 मई 2026 को दुर्ग पुलिस की कार्रवाई के बाद सामने आया था, जब संयंत्र से लौह सामग्री को अवैध रूप से बाहर ले जाने की सूचना मिली थी। जांच के दौरान यह पाया गया कि स्क्रैप को संगठित तरीके से निकालकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने परिवहन, भंडारण और बिक्री से जुड़े संदिग्धों की पहचान करते हुए कई गिरफ्तारियां कीं।
अब तक दुर्ग पुलिस ने इस प्रकरण में 21 आरोपियों को हिरासत में लिया है। पुलिस की कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में लौह स्क्रैप के साथ हाइवा, बैकहो लोडर और अन्य भारी मशीनें भी जब्त की गईं। बरामद संपत्ति का कुल मूल्य लगभग 3 करोड़ 22 लाख रुपये आंका गया था।
CBI को जांच सौंपे जाने के बाद दुर्ग पुलिस अपनी अब तक की विवेचना से जुड़े दस्तावेज एजेंसी को सौंपने की तैयारी कर रही है। इनमें मूल केस डायरी, जब्ती के रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल होंगे। इससे CBI को पुरानी जांच के तथ्यों को सत्यापित करने और आगे की कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
जांच में खास तौर पर गेट पास, वजन पर्चियों, परिवहन दस्तावेजों और संयंत्र की प्रवेश-निकास व्यवस्था की समीक्षा हो सकती है। एजेंसी यह भी तलाश करेगी कि क्या रिकॉर्ड में हेराफेरी हुई और इसमें किन लोगों की संलिप्तता सामने आती है।






