रायपुर:छत्तीसगढ़ में निर्माण कार्यों के भुगतान को लेकर ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन को लेकर अब नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। विभागीय हलकों की मानें तो यह ठेकेदारों का आर्थिक संकट नहीं है, बल्कि विभाग में बैठे भ्रष्टाचार में संलिप्त कुछ बड़े अधिकारियों के इशारे पर रचा गया है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में निर्माण कार्यों के भुगतान को लेकर 27 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में अर्धनग्न अवस्था में कटोरा लेकर अनोखा प्रदर्शन करेंगे। छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन की बैठक में निर्णय लिया गया है।
क्या है इसके पीछे का सच?
जानकारों और अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जब विभाग के बड़े स्तर पर कार्यों की जांच शुरू हुई और कथित अनियमितताओं की परतें खुलने लगीं, तो जांच से ध्यान भटकाने और अपनी खाल बचाने के लिए कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने ठेकेदारों को आगे कर दिया।
विभागीय गलियारों में चर्चा है कि ठेकेदारों की जायज समस्याओं को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करके कुछ अधिकारी प्रशासनिक दबाव बनाने और अपनी काली करतूतों को छिपाने की फिराक में हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक अलग ही चर्चा जोरों पर है- क्या यह वाकई ठेकेदारों की हड़ताल है, या इसके पीछे विभाग में बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की सोची-समझी चाल है?
क्या है पूरा मामला और विवाद?
छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से उनके द्वारा किए गए कार्यों का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके कारण ठेकेदार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इस संबंध में वे पहले भी मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार मुलाकात कर ज्ञापन सौंप चुके हैं।
इससे तीन महीने पहले भी ठेकेदारों ने विधानसभा घेराव के दौरान अर्धनग्न होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। एसोसिएशन का दावा है कि इस प्रदर्शन के पीछे भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों के इशारे और लापरवाही हैं।
विभागीय पक्ष और अधिकारियों का तर्क
दूसरी ओर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच कमेटी द्वारा ठेकेदारों के कार्यों की जांच की गई थी। इसके तहत करीब 300 एग्रीमेंट्स की जांच पूरी हो चुकी है और 99 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, जिन कुछ मामलों में भुगतान शेष है, उसका कारण यह है कि ठेकेदारों द्वारा अभी तक एमडी जमा नहीं किया गया है।
ठेकेदारों की प्रमुख मांगें
- छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार के सामने निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं:
- 2200 करोड़ रुपए के लंबित बिलों का तत्काल भुगतान किया जाए।
- आगामी बिलों के भुगतान के लिए करीब 3000 करोड़ रुपए का अग्रिम बजट जारी हो।
- एग्रीमेंट के अनुसार रनिंग और पार्ट पेमेंट तत्काल शुरू किया जाए।
- 100 प्रतिशत कार्य पूरा होने पर पूर्ण भुगतान सुनिश्चित हो।
- एग्रीमेंट के पश्चात लागू किए गए अतिरिक्त नियमों को समाप्त किया जाए।
- अगले 6 महीने के विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाए।
- भ्रष्ट अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।






