रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) द्वारा राज्यभर में विद्युत नेटवर्क के रखरखाव, ट्रांसफार्मर मरम्मत और फ्यूज ऑफ कॉल (FOC) सेंटरों के संचालन के लिए जारी ₹1,193 करोड़ के एकीकृत एकल टेंडर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय छोटे और मध्यम श्रेणी के ठेकेदारों ने इस निविदा का विरोध करते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है। मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन के ऊर्जा विभाग सचिव और बिजली कंपनी के मुख्य अभियंता तक की गई है।
ठेकेदारों का आरोप है कि पहले जिला और संभाग स्तर पर अलग-अलग निकाली जाने वाली छोटी निविदाओं को अब मिलाकर राज्य स्तर पर एक विशाल एकीकृत टेंडर बना दिया गया है। इससे राज्य के लगभग 1,000 से अधिक मूल निवासी ठेकेदार इस प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। उनका कहना है कि बैंक लोन लेकर सालों से बिजली वितरण कंपनी को सेवाएं दे रहे ये ठेकेदार और उनसे जुड़े हजारों कर्मचारी रोजगार संकट से गुजर रहे हैं।
बस्तर की वैष्णवी ट्रेडर्स की संचालक महादई कश्यप ने प्रधानमंत्री और राज्य शासन को भेजे शिकायती पत्र में कहा है कि इस टेंडर में उच्च वित्तीय पात्रता शर्तें रखी गई हैं, जिसके कारण स्थानीय ठेकेदार प्रतिस्पर्धा में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया बाहरी बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई है, जबकि छत्तीसगढ़ के स्थानीय तकनीकी युवाओं को अपने ही क्षेत्र में मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
ठेकेदारों ने प्रक्रियागत विसंगतियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार राज्य में लगभग 1,600 बिजली उपकेंद्र (33/11 केवी सब-स्टेशन) संचालित हैं, लेकिन इन्हें इस एकीकृत निविदा के दायरे से बाहर रखा गया है। उनका कहना है कि 11 केवी और 33 केवी लाइनों की निगरानी, परमिट जारी करने और लाइन बंद-चालू करने का मुख्य नियंत्रण इन्हीं उपकेंद्रों से होता है। ऐसे में अलग-अलग ठेकेदारों के बीच समन्वय की कमी से तकनीकी गफलत और बिजली हादसों का खतरा बढ़ सकता है।
जारी टेंडर दस्तावेजों के अनुसार पूरे छत्तीसगढ़ को तीन प्रमुख चरणों में बांटा गया है। इसमें कुल 19 सर्किल, 71 संभाग और 537 वितरण केंद्र शामिल किए गए हैं। इस अनुबंध के तहत 25,830 किमी लंबी 33 केवी लाइन, 1,44,708 किमी लंबी 11 केवी लाइन और 2,42,932 किमी एलटी लाइन का रखरखाव किया जाना है। साथ ही राज्यभर में लगभग 2,48,067 वितरण ट्रांसफार्मर और करीब 64.95 लाख उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने का लक्ष्य रखा गया है।
बिजली आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए कंपनी 24 घंटे काम करने वाली फ्यूज ऑफ कॉल और मेंटेनेंस टीमों की तैनाती करेगी। प्रत्येक जोन और वितरण केंद्र स्तर पर वाहन, स्काई लिफ्ट और पोल मास्टर जैसी आधुनिक मशीनरी की व्यवस्था अनिवार्य रखी गई है। सभी वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और ‘प्रकाश’ मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि उपभोक्ता शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके।
कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता के लिए टेंडर में कड़े सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) और पेनल्टी के प्रावधान भी रखे गए हैं। ठेकेदार को तय समय में शिकायतों का निपटारा करना होगा, अन्यथा बिल से राशि की कटौती की जा सकेगी। कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण, बीमा कवरेज और अनुग्रह राशि संबंधी नियमों का पालन करना होगा। वेतन भुगतान हर महीने की 7 तारीख से पहले ईसीएस के माध्यम से करना अनिवार्य रखा गया है, साथ ही ईपीएफ और ईएसआईसी के नियमों का पालन भी जरूरी होगा।
इस टेंडर में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ या अन्य राज्यों के विद्युत लाइसेंस बोर्ड से वैध ‘ए’ क्लास इलेक्ट्रिकल ठेकेदार (एचटी) लाइसेंस होना अनिवार्य है। न्यूनतम औसत वार्षिक टर्नओवर ₹358.04 करोड़ निर्धारित किया गया है। टेंडर शुल्क ₹10,000 और बयाना राशि ₹11.93 करोड़ रखी गई है। ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दस्तावेज जमा करने की अंतिम तिथि 17 नवंबर 2026 को दोपहर 3 बजे तक है, जबकि तकनीकी बोली उसी दिन दोपहर 3:30 बजे CSPDCL के डंगनिया स्थित कार्यपालक निदेशक (O&M) कार्यालय में खोली जाएगी।
स्थानीय ठेकेदारों ने मांग की है कि ₹1,193 करोड़ के इस विशाल एकीकृत टेंडर को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। उन्होंने राज्य के सरकारी टेंडरों में छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को प्राथमिकता देने और पुरानी विकेंद्रीकृत व्यवस्था बहाल करते हुए जिला व सर्किल स्तर पर पारदर्शी छोटे टेंडर जारी करने की मांग की है। अब देखना होगा कि PMO और राज्य सरकार तक पहुंची शिकायत के बाद बिजली कंपनी इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है।





