भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक कमलनाथ ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूँ के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में केवल 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को किसानों के साथ मजाक बताया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और भाजपा शासित राज्य सरकारें किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनहीन बनी हुई हैं।
केंद्र सरकार ने गेहूँ का MSP 2,585 रुपये से बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल किया है। यानी गेहूँ के समर्थन मूल्य में महज करीब एक प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार के अनुसार, 2027-28 सत्र के लिए गेहूँ की अनुमानित उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल है।
कमलनाथ ने कहा कि पिछले एक वर्ष में खेती की लागत और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे समय में गेहूँ के MSP में केवल 25 रुपये की वृद्धि “ऊँट के मुँह में जीरा” के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार या तो किसानों का मजाक उड़ा रही है या फिर उसे किसानों से कोई हमदर्दी नहीं है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,700 रुपये प्रति क्विंटल करने का वादा किया था। किसानों को उम्मीद थी कि वर्ष 2024 से उन्हें यह समर्थन मूल्य मिलना शुरू हो जाएगा, लेकिन यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है।
कमलनाथ ने भाजपा पर किसानों से किए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार बनने के लगभग तीन वर्ष बाद भी गेहूँ का MSP 2,700 रुपये प्रति क्विंटल नहीं किया गया। उन्होंने इसे भाजपा का किसान विरोधी चरित्र बताया।
उन्होंने केंद्र सरकार से गेहूँ का MSP बढ़ाकर कम से कम 3,000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की। साथ ही चना, मसूर, सरसों और अन्य रबी फसलों के समर्थन मूल्य में भी किसानों की लागत और महंगाई के अनुरूप उचित वृद्धि करने की मांग रखी।
रबी सत्र 2027-28 के लिए चने का MSP 5,958 रुपये, मसूर का 7,390 रुपये और रेपसीड-सरसों का 6,613 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। सरकार ने इन फसलों के MSP में गेहूँ की तुलना में अधिक वृद्धि की है, लेकिन कमलनाथ ने इसे भी किसानों की वास्तविक लागत और आय के लिहाज से अपर्याप्त बताया है।





