कांकेर में वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह: केदार कश्यप ने 60 लाख की तकनीकी परियोजनाओं का किया ऐलान

Madhya Bharat Desk
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कांकेर।छत्तीसगढ़ के कांकेर वनमंडल में राज्य स्तरीय वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह का आयोजन किया गया। वन मंत्री केदार कश्यप के मुख्य आतिथ्य में हुए इस कार्यक्रम में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। कार्यक्रम के दौरान करीब 60 लाख रुपये की तकनीकी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

वन मंत्री केदार कश्यप ने भालू और तेंदुओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 40 लाख रुपये की लागत से रेडियो कॉलरिंग परियोजना को मंजूरी देने की घोषणा की। इसके अलावा ग्रामीणों को समय पर सूचना देने के लिए AI मॉनिटरिंग और मोबाइल अलर्ट ऐप तैयार किया जाएगा। इसके लिए 20 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। वन्यप्राणियों के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस एक नया रेस्क्यू वाहन भी उपलब्ध कराया जाएगा।

एक साल में भालू की समस्या दूर करने का लक्ष्य

वन मंत्री ने कहा कि वन्यप्राणी संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम लोगों की भी भागीदारी जरूरी है। उन्होंने सभी से वन्यप्राणियों के संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। साथ ही उन्होंने कांकेर क्षेत्र में भालू से जुड़ी समस्या का एक साल के भीतर समाधान करने का लक्ष्य रखा।

कांकेर में मानव-वन्यजीव संघर्ष के आंकड़े सामने आए

तकनीकी सत्र में वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के. ने कांकेर वनमंडल से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि कांकेर के कुल 2,68,660 हेक्टेयर क्षेत्र में से करीब 70,535 हेक्टेयर क्षेत्र वनभूमि है।

उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। इसके अनुसार अब तक 23 लोगों की जनहानि, 55 लोग घायल, 370 पशुहानि और 442 फसल नुकसान के मामले सामने आए हैं।

उन्होंने बताया कि हेल्पलाइन नंबर शुरू होने के बाद भालू और तेंदुओं की मौजूदगी से जुड़ी सूचनाएं लगातार मिल रही हैं। इससे वन विभाग को समय पर कार्रवाई करने और कम समय में रेस्क्यू करने में मदद मिल रही है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के विशेषज्ञ अविनाश यादव और आशीष जांगिड़ ने भी अर्ली वार्निंग अलर्ट सिस्टम और GPS ट्रैकिंग को लेकर प्रस्तुति दी।

तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन

कार्यक्रम में वन्यजीव और जंगलों से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण कॉफी टेबल बुक्स और पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। इनमें गोमर्डा वन्यजीव अभ्यारण्य की जैव-विविधता पर आधारित “Gomarda: The Hidden Emerald of Chhattisgarh” शामिल है।

इसके अलावा “अचानकमार की जीती जागती कहानी झुमरी की जुबानी” पुस्तिका का विमोचन हुआ, जिसमें 25 वर्षों के अनुभव के आधार पर एक बाघिन के नजरिए से जंगल और उसके संघर्ष की कहानी बताई गई है।

वहीं “Timeless Imprints: Guru Ghasidas Tamor Pingla Tiger Reserve” में टाइगर रिजर्व के प्राचीन शैल चित्रों और पुरातात्विक धरोहरों को शामिल किया गया है।

उत्कृष्ट वनकर्मियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भी भागीदारी रही। विधायक आशाराम नेताम सहित जिला और जनपद पंचायत के अध्यक्षों व उपाध्यक्षों ने वन विभाग के राहत और बचाव कार्यों की सराहना की।

जन-संवाद के दौरान ग्रामीणों की समस्याएं भी सुनी गईं। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और रेस्क्यू के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले मैदानी वन अधिकारियों और कर्मचारियों को वन मंत्री ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में PCCF एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय, PCCF (वन्यप्राणी) ओ.पी. यादव, CCF कांकेर विवेकानंद झा, कलेक्टर कुन्दन कुमार और DFO ससिगानंदन के. सहित वन विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। अंत में CCF विवेकानंद झा के आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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