नई दिल्ली/रायपुर।दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 में अदालत के समक्ष दाखिल CBI के एक जवाब में प्रथमदृष्टया गलत तथ्य प्रस्तुत किए जाने के मामले में छह अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने IRS के पूर्व अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट के 25 अक्टूबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड, लगातार तैयार किए गए ड्राफ्ट और संबंधित अधिकारियों की भूमिका से प्रथमदृष्टया ऐसा आधार बनता है कि 2 अगस्त 2016 के जवाब में अदालत के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्य गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट ने Section 340 CrPC के तहत शिकायत दर्ज करना न्यायहित में आवश्यक माना।
क्या है पूरा मामला?
CBI ने IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 जनवरी 2016 को अभियोजन स्वीकृति को अवैध ठहराया, जिसके बाद विशेष अदालत ने 10 मार्च 2016 को अग्रवाल को डिस्चार्ज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने जांच के दौरान जब्त दस्तावेज वापस किए जाने की मांग की।
CBI ने 2 अगस्त 2016 को अदालत में दाखिल जवाब में कहा था कि आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार “under way” है और दस्तावेज आगे की कानूनी कार्यवाही में आवश्यक हो सकते हैं।
हालांकि, रिकॉर्ड के अनुसार कानून एवं न्याय मंत्रालय 8 जून 2016 को ही राय दे चुका था कि मामले को उच्चतर अदालत में आगे ले जाने का कोई उचित आधार नहीं दिखता। यह राय CBI को 1 जुलाई 2016 को उपलब्ध करा दी गई थी। हाईकोर्ट ने पाया कि 2 अगस्त 2016 को वास्तव में मंत्रालय के साथ कोई सक्रिय पत्राचार नहीं चल रहा था; CBI के भीतर मामले पर पुनर्विचार और वरिष्ठ कानून अधिकारियों की राय लेने की प्रक्रिया चल रही थी।
ड्राफ्ट में बदलाव पर भी अदालत की नजर
हाईकोर्ट ने CBI की फाइल नोटिंग और अलग-अलग ड्राफ्ट का भी परीक्षण किया। कोर्ट के मुताबिक शुरुआती ड्राफ्ट में DoPT द्वारा SLP दाखिल करने के प्रस्ताव को ठुकराए जाने का उल्लेख था। बाद के ड्राफ्ट में इस तथ्य को हटाकर हाथ से यह बात जोड़ी गई कि मंत्रालय के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर पत्राचार जारी है।
अदालत ने प्रथमदृष्टया इस हस्तलिखित बदलाव को तत्कालीन HoZ विनीत विनायक से जोड़ा और कहा कि अंतिम जवाब को 1 अगस्त 2016 को उनकी मंजूरी मिली थी। अदालत ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत के स्तर पर अधिकारियों की सटीक जानकारी और आपराधिक दायित्व का अंतिम निर्धारण सक्षम अदालत द्वारा किया जाएगा।
सीबीआई के इन अधिकारियों पर गिरी गाज
विनीत विनायक- तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर
अमित कुमार -तत्कालीन डीआईजी
रमन त्यागी -तत्कालीन एसपी
प्रेम कुमार गौतम -तत्कालीन एसपी
सुशील दीवान-तत्कालीन सब इंस्पेक्टर
मोहम्मद आज़ाद -तत्कालीन विशेष लोक अभियोजक (Special PP)
अदालत ने शिकायत में IPC की धारा 191 सहपठित धारा 193 तथा धारा 209 के तहत कथित अपराधों का उल्लेख करने का निर्देश दिया है। शिकायत चार सप्ताह के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजने को कहा गया है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित सक्षम अदालत मामले में स्वतंत्र रूप से आगे की कार्यवाही करेगी और केवल शिकायत निर्देशित किए जाने के आधार पर संबंधित अधिकारियों को दोषी नहीं माना जा सकता।






