रायपुर/जगदलपुर।राज्य शासन ने सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अनुपालन में शैलेन्द्र कुमार पटेल को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर, जगदलपुर में कुलसचिव के पद पर पदस्थ किया है। यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसएलपी सिविल क्रमांक 22648/2025 में 20 अगस्त 2026 को दिए गए अंतिम निर्णय के आधार पर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में शैलेन्द्र कुमार पटेल को 9 फरवरी 2021 के विज्ञापन के अनुसार कुलसचिव पद के लिए पात्र माना है। अदालत ने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की 28 जून 2023 की जांच रिपोर्ट को उनके मामले में प्रभावी नहीं मानने का निर्देश दिया।
अदालत ने राज्य सरकार के 31 अक्टूबर 2022 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें शैलेन्द्र कुमार पटेल को कुलसचिव पद के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया था कि वह फैसले की तारीख से तीन सप्ताह के भीतर छत्तीसगढ़ के किसी राज्य विश्वविद्यालय में उन्हें कुलसचिव पद पर नियुक्त करे।


फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शैलेन्द्र कुमार पटेल को उन अभ्यर्थियों की नियुक्ति तिथि से कुलसचिव पद पर नियुक्त माना जाएगा, जिनके साथ उनका चयन और अनुशंसा की गई थी। उन्हें नियमानुसार सेवा लाभ और वरिष्ठता का लाभ भी मिलेगा।
हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि 10 अप्रैल 2023 को दी गई उनकी अस्थायी नियुक्ति से पहले की अवधि का वेतन बकाया उन्हें नहीं मिलेगा। उनकी वरिष्ठता का निर्धारण संबंधित वैधानिक नियमों के अनुसार किया जाएगा।
शैलेन्द्र कुमार पटेल की पात्रता और नियुक्ति को लेकर पहले राज्य सरकार, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामला चला था। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 17 जून 2025 को उनके खिलाफ फैसला दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अब निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही संबंधित रिट याचिकाओं को मंजूर कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चयनित अभ्यर्थी की पात्रता का निर्णय सक्षम चयन संस्था द्वारा किए जाने के बाद नियुक्ति प्राधिकारी उसी पात्रता का स्वतंत्र रूप से पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकता। हालांकि, नियुक्ति से पहले दस्तावेजों की वास्तविकता और प्रामाणिकता की जांच करने का अधिकार राज्य शासन के पास रहेगा।
राज्य शासन ने अब शीर्ष अदालत के आदेश का पालन करते हुए शैलेन्द्र कुमार पटेल को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर, जगदलपुर में कुलसचिव पद पर पदस्थ किया है। इस आदेश के साथ ही उनकी नियुक्ति से जुड़ा कानूनी विवाद समाप्त हो गया है।






