मानव-भालू संघर्ष: कचरे में भोजन तलाशता भालू दे रहा पर्यावरण संकट की चेतावनी

Madhya Bharat Desk
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उत्तर बस्तर के कांकेर शहर से सामने आई एक झकझोर देने वाली तस्वीर ने पर्यावरणविदों और आम नागरिकों को चिंता में डाल दिया है। शहर के कचरा डंपिंग यार्ड और रिहाइशी इलाके के आसपास कचरे के ढेर में भोजन तलाशते जंगली भालू की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।  यह दृश्य न केवल वन्यजीव सुरक्षा, बल्कि इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की एक गंभीर चेतावनी प्रस्तुत कर रहा है।

जंगलों पर बढ़ता मानवीय दबाव और उत्खनन

कांकेर और आसपास के पहाड़ियों एवं वन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से उत्खनन (Mining), अनियंत्रित निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों के कारण जंगलों पर दबाव काफी बढ़ गया है।

प्राकृतिक आवास का विनाश:अंधाधुंध कटाई और खनन गतिविधियों, विशेषकर रावघाट आयरन ओर माइन परियोजना के कारण, वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारे (Corridors) बाधित हो रहे हैं।

भोजन का अभाव: महुआ, चार, तेंदू और अन्य प्राकृतिक खाद्य स्रोतों में आ रही कमी के कारण भालू और अन्य वन्यजीव भोजन व पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों का रुख करने लगे हैं।

प्लास्टिक और कचरे का खतरा: कचरे के ढेर में बचा-खुचा खाना खाने के चक्कर में भालू जहरीले प्लास्टिक और हानिकारक अपशिष्टों का सेवन कर रहे हैं, जिससे उनकी सेहत और जीवन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष

कांकेर शहर चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है और यह क्षेत्र भालुओं के प्राकृतिक आवास के रूप में जाना जाता है।  हालांकि, पहले भालू केवल रात के अंधेरे में पहाड़ियों तक सीमित रहते थे, लेकिन अब दिन-दिहाड़े या ढलती शाम को शहर की सड़कों और आवासीय कॉलोनियों में उनकी मौजूदगी आम बात होती जा रही है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कचरे के ढेरों पर भोजन की आदत लगने से भालू अब शहर की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं।  इससे किसी भी समय अप्रिय घटना या मानव-भालू संघर्ष की संभावना बढ़ गई है।  वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कांकेर वन मंडल में लगभग 100 भालू निवास करते हैं और 2021 से 2026 के बीच भालू के हमलों में 12 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 55 लोग घायल हुए हैं।

कांकेर की यह तस्वीर केवल एक भालू की कहानी नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम के संकट का प्रतीक है। यदि समय रहते वन संरक्षण, कचरा प्रबंधन और सतत विकास के उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में इंसान और वन्यजीवों दोनों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।

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