कवर्धा। गांधी जयंती के दिन कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभयारण्य में ‘वन्यजीव सप्ताह-2026’ का धूमधाम से शुभारंभ हुआ। भोरमदेव मंदिर परिसर से निकाली गई जागरूकता रैली अभयारण्य के आसपास के इलाकों तक गई, जिसके बाद वहां स्वच्छता अभियान चलाया गया। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लिया।


जंगल की सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी
कार्यक्रम के वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा केवल विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने प्लास्टिक मुक्त अभयारण्य, प्राकृतिक आवास की सफाई और मानव-वन्यजीव संघर्ष घटाने जैसे मुद्दों पर भी बात की। जनभागीदारी का यह नजारा इस बात का सबूत था कि छत्तीसगढ़ के लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक और संकल्पित हैं।


सप्ताहभर चलेंगे खास कार्यक्रम
2 से 8 अक्टूबर तक चलने वाले इस संरक्षण सप्ताह में युवाओं और पर्यटकों के लिए कई खास कार्यक्रम रखे गए हैं। इनमें वन नाइट-लाइफ के जरिए रात के जंगल और nocturnal जानवरों को करीब से समझने का मौका, तितलियों और पक्षियों की पहचान, और ट्रैप कैमरा निगरानी जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इस दौरान वन्यजीवों की आवाजाही को समझने के लिए तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

भोरमदेव: वन्यजीवों का अहम गलियारा
करीब 352 वर्ग किमी में फैला भोरमदेव अभयारण्य मैकल पर्वतमाला में स्थित है और कान्हा नेशनल पार्क–अचानकमार टाइगर रिजर्व के बीच अहम वन्यजीव गलियारे के रूप में जाना जाता है। यहां तेंदुआ, भालू, चीतल, नीलगाय, जंगली भैंसा और अनेक पक्षी पाए जाते हैं, और यह क्षेत्र तेंदुओं की बढ़ती आबादी के कारण ‘लेपर्ड हब’ बनने की राह पर है।





