भिलाई में मेडिकल वेस्ट के निपटान को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां शंकराचार्य हॉस्पिटल से निकला मेडिकल वेस्ट नगर निगम मुख्यालय से मात्र 50 फीट की दूरी पर अन्य सामान्य कचरे के साथ डंप किया जा रहा है। यह प्रकरण न केवल स्थानीय नागरिकों की सेहत के साथ खिलवाड़ है, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा लागू Bio-Medical Waste Management Rules, 2016 का सीधा उल्लंघन है।
नियम क्या कहते हैं?
भिलाई नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए मेडिकल वेस्ट उठाने वाली कंपनी अर्बन एनवायरो पर 25,000 रुपये और शंकराचार्य हॉस्पिटल पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। पर सवाल यह उठता है कि क्या केवल चंद हजार रुपये का जुर्माना लगाने से ऐसी गंभीर लापरवाही रुक जाएगी? विशेषज्ञों का मानना है कि Bio-Medical Waste Rules के तहत उल्लंघन पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा भी हो सकती है।
निगम की जिम्मेदारी क्या है?
भिलाई नगर निगम केवल जुर्माना लगाकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। नियमों के अनुसार नगर निगमों को अस्पतालों से उत्पन्न गैर-बायोमेडिकल ठोस कचरा उठाने और उपचारित बायोमेडिकल वेस्ट को म्युनिसिपल डंपिंग साइट तक ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निगम को यह सुनिश्चित करना होगा कि मेडिकल वेस्ट को वैज्ञानिक तरीके से निपटाया जाए और सामान्य कचरे के साथ मिश्रित न किया जाए। अर्बन एनवायरो जैसी कंपनियों के कार्य पर नियमित निगरानी रखना निगम की जिम्मेदारी है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा
मेडिकल वेस्ट में संक्रामक पदार्थ, सुइयां, रक्त से सने कपड़े, शल्य चिकित्सा के अवशेष आदि हो सकते हैं जो सामान्य कचरे के साथ डंप करने से स्थानीय आबादी, सफाई कर्मचारियों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। भिलाई नगर निगम मुख्यालय के इतने निकट ऐसे खतरनाक कचरे का डंप किया जाना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक निगरानी कितनी ढील है।





