जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने सभी 10 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपियों को हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया है।
इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक माना जाता है।
करीब 13 साल पुराने इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए। शुरुआत में 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चल रहा था, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद बाकी 10 आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी रही।
5 सितंबर को 10 आरोपी दोषी करार
जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 5 सितंबर को सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। रिपोर्टों के अनुसार, दोषियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। बचाव पक्ष ने अदालत के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला सुकमा से जगदलपुर लौट रहा था। इसी दौरान बस्तर के दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया था।
इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं, आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी। मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे।
NIA को सौंपी गई थी जांच
हमले के बाद मामले की जांच NIA को सौंप दी गई थी। घटना की जांच के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का भी गठन किया गया था।
NIA की जांच के दौरान कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और मामला विशेष अदालत तक पहुंचा। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए और दस्तावेजों सहित अन्य साक्ष्य अदालत में पेश किए।






