हेमचंद यादव विवि : FIR के बाद कुलसचिव के वित्तीय अधिकार वापस

Madhya Bharat Desk
5 Min Read

दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप के वित्तीय अधिकार वापस लेने का फैसला किया है। अब आगामी आदेश तक विश्वविद्यालय के भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और बैंकिंग लेन-देन में वित्त अधिकारी के साथ दूसरा अधिकृत हस्ताक्षर अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. नीलू श्रीवास्तव करेंगी। यानी अब कुलसचिव के हस्ताक्षर से विश्वविद्यालय का कोई वित्तीय लेन-देन नहीं होगा।

बैठक में कुलसचिव के मामले पर हुई चर्चा

हाल ही में हुई कार्यपरिषद की बैठक में कुलसचिव के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद उनके वित्तीय अधिकारों को लेकर चर्चा हुई। बैठक के दौरान कुलपति ने कहा कि मामला कार्यपरिषद के सामने है और निष्पक्ष चर्चा के लिए कुलसचिव की मौजूदगी उचित नहीं होगी।

इस पर कुलसचिव ने कहा कि अगर कार्यपरिषद के सभी सदस्य चाहेंगे, तभी वे बैठक से बाहर जाएंगे। इसके बाद कार्यपरिषद के सदस्यों ने लिखित सहमति देते हुए हस्ताक्षर किए। इसके बाद कुलसचिव को इस मुद्दे की चर्चा से अलग कर दिया गया और डॉ. नीलू श्रीवास्तव को प्रभारी सचिव बनाकर आगे की कार्यवाही की गई।

कार्यपरिषद के सदस्य नहीं होते कुलसचिव

विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत कुलसचिव कार्यपरिषद के सचिव होते हैं, लेकिन वे कार्यपरिषद के सदस्य नहीं होते। उनकी भूमिका बैठक का एजेंडा प्रस्तुत करने तक होती है। चूंकि मौजूदा मामला सीधे कुलसचिव से जुड़ा था, इसलिए उनकी अनुपस्थिति में इस पर चर्चा की गई।

अब डॉ. नीलू श्रीवास्तव करेंगी दूसरा हस्ताक्षर

विश्वविद्यालय के सामान्य वित्तीय कामकाज में कुलसचिव और वित्त अधिकारी मिलकर प्रक्रिया पूरी करते हैं। अब कुलसचिव की जगह अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. नीलू श्रीवास्तव वित्त अधिकारी के साथ बैंकिंग और अन्य वित्तीय कामकाज संभालेंगी।

डॉ. श्रीवास्तव शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में प्राध्यापक हैं और शासन की प्रतिनियुक्ति पर विश्वविद्यालय में डीएसडब्ल्यू के पद पर कार्यरत हैं। विश्वविद्यालय के मुताबिक, वे इस जिम्मेदारी के लिए निर्धारित अर्हताएं पूरी करती हैं।

एफआईआर के बाद लिया गया फैसला

कार्यपरिषद ने अपने संकल्प में कहा है कि कुलसचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद विश्वविद्यालय के वित्तीय हित, प्रशासनिक निष्पक्षता और कामकाज को लगातार जारी रखने के लिए यह व्यवस्था की गई है। यह फैसला छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 24, धारा 24-क और विश्वविद्यालय में लागू वित्तीय नियमों के तहत लिया गया है।

वित्त विभाग के नियमों का भी दिया गया हवाला

बैठक में वित्त विभाग के संयुक्त सचिव ने बताया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने और उसके जमानत पर होने की स्थिति में वित्त विभाग के नियमों के अनुसार वह शासकीय भुगतान की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में वित्तीय जिम्मेदारी किसी दूसरे अधिकारी को दी जाती है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने कुलसचिव के स्थान पर दूसरे अधिकारी को जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया।

3 अगस्त को दर्ज हुई थी एफआईआर

कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप के खिलाफ थाना मोहन नगर में 3 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(4) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद वे जमानत पर हैं।

एफआईआर के बाद विश्वविद्यालय की ओर से उच्च शिक्षा संचालनालय के आयुक्त को पत्र भेजकर मार्गदर्शन भी मांगा गया है। पत्र के साथ एफआईआर की कॉपी भी भेजी गई है। इसमें बताया गया है कि कुलसचिव विश्वविद्यालय के वित्तीय देयकों, नस्तियों और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय निधि में कथित अनियमितता से जुड़ा मामला जांच में है। ऐसे में भुगतान, बैंकिंग, वेतन वितरण, खरीदी और अभिलेखों की जिम्मेदारी उन्हीं के पास रहना उचित नहीं है। विश्वविद्यालय ने अभिलेखों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई है।

तीन साल के वित्तीय लेन-देन के ऑडिट की मांग

इस पूरे मामले के बीच विश्वविद्यालय के पिछले तीन वर्षों के वित्तीय लेन-देन का ऑडिट कराने की मांग भी उठी है। वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज, कैशबुक और खरीदी से जुड़ी नस्तियों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

सत्र 2024-25 की परीक्षाओं से जुड़े एक बाहरी फर्म को स्वीकृत करीब 92.10 लाख रुपये के भुगतान समेत कुछ अन्य खर्चों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। इसके अलावा 32 लाख रुपये से जुड़े भुगतान की भी जांच की मांग सामने आई है।

शिकायत में कुलाधिपति से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment