जशपुर।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर से एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की तस्वीर सामने आई है। बगीचा विकासखंड के ग्राम पंचायत पंडरीपानी के पहारटोली गांव में बारिश के दिनों में बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो जाता है। गांव को पंडरीपानी से जोड़ने वाले रास्ते में पुलिया नहीं होने के कारण बच्चों को उफनते पहाड़ी नाले को पार कर स्कूल जाना पड़ता है।
पहारटोली गांव में करीब 70 लोग रहते हैं। यहां अधिकांश आबादी आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय की है। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश शुरू होते ही गांव की समस्याएं बढ़ जाती हैं। कच्ची सड़क और पुलिया के अभाव में नाला पार करना जोखिम भरा हो जाता है।
10 साल से पुलिया की मांग
ग्रामीण रामेश्वर राम के मुताबिक, गांव में पुलिया निर्माण की मांग पिछले करीब 10 वर्षों से स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सामने रखी जा रही है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान यही समस्या सामने आती है, लेकिन मौसम बदलने के साथ यह मुद्दा भी पीछे छूट जाता है।
उफनता नाला रोक देता है बच्चों की पढ़ाई
बारिश के दौरान पहाड़ी नाले में पानी का बहाव तेज हो जाता है। गांव की रामा बाई ने बताया कि जब नाला उफान पर होता है, तो बच्चों के लिए स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। कई बार उन्हें स्कूल जाने से रोकना पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और अभिभावकों को उनकी सुरक्षा की चिंता भी बनी रहती है।
ग्रामीणों के अनुसार, सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन तेज बारिश के दौरान नाले में पानी बढ़ने पर गांव का संपर्क प्रभावित होने लगता है।
इलाज के लिए भी जोखिम भरा सफर
समस्या सिर्फ बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। गांव में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या आपात स्थिति आने पर उसे स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। बारिश के दौरान उफनते नाले को पार करना जोखिम भरा होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहारटोली से पंडरीपानी को जोड़ने वाले मार्ग पर पुलिया और सड़क का निर्माण हो जाए तो बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ ग्रामीणों के आवागमन और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की समस्या का भी समाधान हो सकता है।
सवाल यह है कि जब हर साल बारिश के साथ यह समस्या सामने आती है, तो 10 साल से लंबित पुलिया निर्माण की मांग आखिर कब पूरी होगी?





