छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतें बनेंगी क्लाइमेट रेजिलिएंट, मंत्री कश्यप की नई पहल

Madhya Bharat Desk
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नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की दूरदर्शी सोच के अनुरूप राज्य की ग्राम पंचायतों को जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने के लिए सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इसी कड़ी में आज अरण्य भवन, नवा रायपुर में “डेवलपमेंट ऑफ टेम्पलेट फॉर क्लाइमेट रेजिलिएंट ग्राम पंचायत एक्शन प्लान (CRGPA)” विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने किया मंथन

कार्यशाला की शुरुआत छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र (CGSCCC) के नोडल अधिकारी सुनील कुमार मिश्रा (IFS) के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने बताया कि राज्य में क्लाइमेट रेजिलिएंट ग्राम पंचायत कार्ययोजना तैयार करने के लिए एक आदर्श टेम्पलेट विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग संस्थाओं द्वारा बनाई जा रही योजनाओं में एकरूपता लाना है।

इस मौके पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडे (IFS) ने भी इस पहल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इसे बेहद जरूरी बताते हुए टेम्पलेट को जल्द अंतिम रूप देने और इसके आधार पर योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

कार्यशाला में मुख्य विशेषज्ञ के रूप में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बैंगलोर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एन. एच. रवींद्रनाथ ने एक आदर्श टेम्पलेट प्रस्तुत किया। वहीं, ‘प्रदान’ (PRADAN), ‘टीआरआई फाउंडेशन’ (TRI Foundation) और ‘सीईईडी’ (CEED) जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी राज्य में किए जा रहे काम और अपने अनुभव साझा किए।

क्या है ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट ग्राम पंचायत’?

मंत्री केदार कश्यप के विजन के तहत ग्राम पंचायतों को बुनियादी शासन की महत्वपूर्ण इकाई मानते हुए उन्हें विज्ञान और साक्ष्यों के आधार पर मजबूत बनाने की तैयारी है।

क्लाइमेट रेजिलिएंट ग्राम पंचायत (CRGP) ऐसी स्थानीय संस्था होगी, जो जलवायु परिवर्तन से बचाव और अनुकूलन, आपदा जोखिम कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन को अपनी विकास और शासन व्यवस्था का हिस्सा बनाएगी।

इससे ग्रामीण समुदायों को सूखा, बाढ़, लू और अनियमित बारिश जैसी परिस्थितियों का पहले से आकलन करने, उनसे निपटने और संकट के बाद तेजी से संभलने में मदद मिलेगी।

किन आधारों पर पंचायतों का होगा आकलन?

क्लाइमेट रेजिलिएंट ग्राम पंचायत एक्शन प्लान तैयार करने के लिए पंचायतों का आकलन कई महत्वपूर्ण मानकों के आधार पर किया जाएगा। इनमें जलवायु संवेदनशीलता, प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति, कृषि, जल संसाधन, पारिस्थितिक स्थिति और समुदाय की भागीदारी जैसे पहलू शामिल होंगे।

इस योजना को ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के साथ जोड़कर कई प्रमुख क्षेत्रों में काम किया जाएगा।

इनमें प्रमुख रूप से:

  • जल संसाधन प्रबंधन: वर्षा जल संचयन, खेत तालाब और ड्रिप सिंचाई।
  • क्लाइमेट-स्मार्ट कृषि और मृदा स्वास्थ्य: जलवायु के अनुकूल फसलें, जैविक खेती और मिट्टी की जांच।
  • वन एवं अन्य स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन।
  • आजीविका में विविधता: मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और कौशल विकास।

स्कोरकार्ड से होगी पंचायतों की निगरानी

ग्राम पंचायतों की प्रगति पर लगातार नजर रखने के लिए एक स्कोरकार्ड आधारित मॉनिटरिंग टूल (M&E Tool) भी तैयार किया जाएगा।

योजना के सफल क्रियान्वयन और मूल्यांकन के बाद पंचायतों को उनके प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रेटिंग और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। ये श्रेणियां होंगी—

  • एक्सीलेंट क्लाइमेट रेजिलिएंट ग्राम पंचायत
  • हाइली क्लाइमेट रेजिलिएंट
  • मॉडरेटली क्लाइमेट रेजिलिएंट
  • डेवलपिंग क्लाइमेट रेजिलिएंस
  • तत्काल सुधार की आवश्यकता वाले पंचायत (Needs Immediate Improvement)

कार्यशाला के समापन सत्र में प्रतिभागियों के लिए समूह अभ्यास भी कराया गया। अंत में डॉ. अनिल श्रीवास्तव, परियोजना वैज्ञानिक, छत्तीसगढ़ जलवायु परिवर्तन केंद्र ने सभी अधिकारियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

मंत्री केदार कश्यप की यह पहल छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यावरण की दृष्टि से अधिक टिकाऊ बनाने और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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