रायपुर।शराब और कोल घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू की टीम ने रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी पूछताछ शुरू कर दी। इससे पहले मंगलवार को तेलीबांधा स्थित ईओडब्ल्यू मुख्यालय में उससे करीब आठ घंटे तक सवाल-जवाब किए गए थे।
पूछताछ के बाद मंगलवार रात उसे घर जाने की अनुमति दे दी गई थी और बुधवार सुबह फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया। रामगोपाल अग्रवाल कई चर्चित घोटालों में आरोपी हैं। इनमें करीब 3000 करोड़ रुपये का शराब घोटाला, 450 करोड़ रुपये का कोल लेवी वसूली मामला, 127 करोड़ रुपये का कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला और डीएमएफ घोटाला शामिल हैं। इन मामलों की जांच ईडी भी कर चुकी है। जांच के दौरान कई बड़े लोगों की गिरफ्तारी हुई और करोड़ों रुपये की संपत्ति जब्त व अटैच की गई।
रामगोपाल अग्रवाल पिछले तीन साल से फरार बताए जा रहे हैं। ईडी और ईओडब्ल्यू की ओर से कई बार समन भेजे जाने के बावजूद वे पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए। इस बीच उनके करीबी और पीसीसी दफ्तर से जुड़े कुछ कर्मचारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। समय-समय पर उनके कभी देश में तो कभी दुबई में होने की खबरें भी सामने आती रही हैं।
रामगोपाल अग्रवाल करीब एक दशक तक छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहे। वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने और भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव और बढ़ गया। कोषाध्यक्ष रहते हुए उन्हें नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष भी बनाया गया। उनके कार्यकाल में कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलरों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 40 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई थी। ईडी की जांच में दावा किया गया कि इस प्रोत्साहन राशि के बदले 127 करोड़ रुपये का कमीशन लिया गया। वहीं जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि शराब घोटाले का पैसा भी कोषाध्यक्ष होने के कारण रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचा।
इन्हीं मामलों में कार्रवाई से बचने के लिए रामगोपाल अग्रवाल पिछले तीन साल से फरार हैं। इधर, प्रदेश कांग्रेस बिना स्थायी कोषाध्यक्ष के ही कामकाज चला रही है। कोषाध्यक्ष से जुड़े वित्तीय अधिकार और बैंक दस्तावेज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और महामंत्री मलकीत सिंह गेंदू के पास हैं।




