जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने पंडवानी की महान कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई का जाना सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की लोक कला और सांस्कृतिक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी बेहतरीन प्रतिभा, वर्षों की साधना और कड़ी मेहनत के दम पर छत्तीसगढ़ की लोकगायन परंपरा ‘पंडवानी’ को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अलग पहचान दिलाई। उन्होंने पूरी जिंदगी लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने और उसे सहेजने का काम किया। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व स्तर पर सम्मान दिलाया। उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद तीजन बाई ने कभी अपनी कला का साथ नहीं छोड़ा। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और अपनी संस्कृति के प्रति अटूट निष्ठा का प्रेरणादायक उदाहरण है। आने वाली पीढ़ियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपनी लोक संस्कृति और विरासत को सहेजने का संकल्प लेना चाहिए।
केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका जाना छत्तीसगढ़ की उस अनमोल धरोहर का खो जाना है, जिसने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
वन मंत्री ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिजनों, प्रशंसकों तथा कला जगत से जुड़े सभी लोगों को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने श्रद्धेय तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी कला, उनकी साधना और उनका योगदान हमेशा अमर रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।





