बिलासपुर।छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग के कामकाज पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी द्वारा अदालत के सामने गलत जानकारी देना बेहद गंभीर मामला है।
पुलिस की ओर से दावा किया गया था कि एक जमानत आवेदक के खिलाफ 19 आपराधिक मामले दर्ज हैं। बाद में यह जानकारी पूरी तरह गलत निकली। इस लापरवाही पर अधिकारी पर लगाया गया ₹500 का जुर्माना हाई कोर्ट ने “सिर्फ दिखावा” बताया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत गिरफ्तार दो आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पिछली सुनवाई में राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया था कि आवेदक नंबर 2, जगदीप सिंह, के खिलाफ 19 आपराधिक मामले लंबित हैं।
इसके बाद आरोपी ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मामला गंभीर होने पर कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत हलफनामा देकर सच्चाई बताने का निर्देश दिया।
बाद में जशपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) द्वारा दाखिल हलफनामे में माना गया कि 19 मामलों की जानकारी गलत दी गई थी। साथ ही बताया गया कि इस बड़ी लापरवाही के लिए जांच अधिकारी पर ₹500 का जुर्माना लगाया गया और भविष्य में सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई।
हाई कोर्ट ने इस कार्रवाई को नाकाफी माना। अदालत ने कहा कि किसी बेगुनाह व्यक्ति को कोर्ट के सामने कई आपराधिक मामलों का आरोपी बताना उसकी आजादी और छवि, दोनों के साथ खिलवाड़ है। ऐसे मामले में सिर्फ ₹500 का जुर्माना लगाना न्याय का मजाक है।
कोर्ट ने पाया कि आवेदक नंबर 2 का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, जबकि आवेदक नंबर 1 पर पंजाब में केवल एक मामला दर्ज था। दोनों आरोपी अक्टूबर 2025 से जेल में थे। चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और ट्रायल पूरा होने में समय लग सकता है। इन बातों को देखते हुए हाई कोर्ट ने दोनों आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी।
साथ ही कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि दोषी अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई पर दोबारा विचार करें और इस लापरवाही पर जशपुर SSP से जवाब मांगा जाए।






