डॉ. चौलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना मुगल शासक औरंगजेब से करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी न केवल राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि देशवासियों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाली है। चौलेश्वर ने कहा कि औरंगजेब का इतिहास अत्याचार, धार्मिक कट्टरता और क्रूरता से जुड़ा रहा है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रहित, विकास और मजबूत नेतृत्व के प्रतीक हैं। ऐसे में इस प्रकार की तुलना पूरी तरह अनुचित है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार का कार्यकाल भ्रष्टाचार और विवादों से घिरा रहा। चौलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि शराब नीति मामले सहित कई कथित घोटालों में आम आदमी पार्टी के नेताओं के नाम सामने आए, जिससे दिल्ली की छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि जो नेता खुद भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हों, उन्हें देश के प्रधानमंत्री पर सवाल उठाने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
किसान नेता ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में अवैध घुसपैठियों और रोहिंग्या मुसलमानों को संरक्षण देने की राजनीति ने राजधानी की सुरक्षा और व्यवस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी लगातार तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।
चौलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि देश की जनता अब ऐसे नेताओं की राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है और आने वाले समय में पंजाब में भी आम आदमी पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के कई मंत्री और विधायक भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे हुए हैं और जनता अब उनसे जवाब मांग रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत माता के सच्चे सपूत हैं और उनके नेतृत्व में भारत ने विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। देश आज आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और विकास के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
चौलेश्वर चंद्राकर ने अरविंद केजरीवाल को अपनी भाषा और बयानबाजी पर संयम रखने की सलाह देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत और ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील टिप्पणियां समाज में गलत संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब इस तरह की ओछी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी और गैरजिम्मेदार बयान देने वाले नेताओं का विरोध और तेज होगा।
उन्होंने अंत में कहा कि देश के प्रधानमंत्री का अपमान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे भारत और देशवासियों का अपमान है। राजनीतिक दलों और नेताओं को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए जिम्मेदारी के साथ बयान देना चाहिए, ताकि लोकतंत्र की गरिमा बनी रहे।



