बालोद: जिले में टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक ही इंजीनियर ने दो अलग-अलग ठेकेदारों के लिए तकनीकी तौर पर काम किया, जो लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की निविदा गाइडलाइन 2014 के खिलाफ माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, टेंडर क्रमांक 397 के तहत अधोसंरचना मद में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए निविदा जारी की गई थी। इस टेंडर में हिस्सा लेने वाली दो प्रतिस्पर्धी फर्मों में से एक एमएस श्री इंफ्रास्ट्रक्चर बताई जा रही है। दोनों फर्मों के तकनीकी दस्तावेजों में इंजीनियर केशव मंत्री का नाम सामने आया है।
शिकायतकर्ता कमलेश साहू ने आरोप लगाया है कि संबंधित इंजीनियर को दोनों फर्मों में अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ दर्शाया गया है। ऐसे में पूरी टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायत में इसे हितों के टकराव यानी “कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट” का साफ मामला बताया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब एक ही व्यक्ति दो प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए काम करता है, तो निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। इससे टेंडर प्रक्रिया के साथ-साथ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
पीडब्ल्यूडी गाइडलाइन पर उठे सवाल
पीडब्ल्यूडी की निविदा गाइडलाइन 2014 के अनुसार किसी भी निर्माण कार्य में नियुक्त तकनीकी व्यक्ति केवल एक ही ठेकेदार के साथ जुड़ा रह सकता है। इसके अलावा टेंडर में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों को यह घोषणा देना भी जरूरी होता है कि उनका किसी अन्य प्रतिस्पर्धी फर्म से संबंध नहीं है। ऐसे में एक ही इंजीनियर का दो अलग-अलग फर्मों से जुड़ा होना नियमों की अनदेखी माना जा रहा है।
जांच और कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर संबंधित दोनों फर्मों के तकनीकी दस्तावेजों की गहराई से जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित निविदा को निरस्त किया जाए और दोषी ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही विभाग से पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग भी की गई है।



