भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। खबर है कि अगर कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट रहे और सबने संयम बरती, तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का राज्यसभा जाना लगभग तय है।
दिल्ली में हुई एक अहम बैठक में कमलनाथ के साथ दिग्विजय सिंह, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मौजूद रहे। बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा हुई और सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर नेताओं ने कमलनाथ के नाम पर सहमति जता दी है।
अब पार्टी की नजर अपने विधायकों पर है। नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे विधायकों का मूड समझें और किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग को रोकें। इसके लिए जल्द ही सभी विधायकों को भोपाल बुलाकर बातचीत भी की जा सकती है, ताकि कोई टूट-फूट न हो।
इधर, सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि दिग्विजय सिंह ने खुद राज्यसभा जाने से मना कर दिया है। ऐसे में पार्टी अब सबसे सीनियर नेता कमलनाथ को आगे बढ़ाने के मूड में दिख रही है और कमलनाथ ही है जो पार्टी को मजबूती से खड़ा रख सकते है क्योंकि वे मध्यप्रदेश में जनता के मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय है।
अगर गणित की बात करें तो मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है। एक सीट जीतने के लिए करीब 58 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आसानी से जीत सकती है।
वहीं कांग्रेस के पास फिलहाल 64 विधायक हैं, लेकिन कुछ कारणों से यह संख्या थोड़ी प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में कांग्रेस को अपनी एक सीट बचाने के लिए पूरी एकजुटता दिखानी होगी।
कांग्रेस के लिए यह चुनाव एक बड़ी परीक्षा जैसा है, जहां एक-एक विधायक की बड़ी भूमिका रहने वाली है।



