छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन पूरी तरह फैल हो चुका है। एक ओर सरकार मंचों पर बड़े बड़े वादे करते फिरती है तो वही दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
हर घर नल के लिए करोड़ों रुपए लगाए जाना सिर्फ सरकार की फाइलों में ही रह गई है इस भीषण गर्मी में जमीन में अगर कुछ दिखाई देता है तो वह है सूखे नल और पानी के लिए संघर्ष करते लोग।
छत्तीसगढ़ के बस्तर के पिपलावंद जमगुड़ा में एक दिव्यांग आदिवासी महिला को पानी के लिए सड़क पर रेंगना पड़ रहा है, यह जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत और विफलता को उजागर करता है। हर घर नल का दावा किया गया, लेकिन दूरदराज़ आदिवासी इलाकों में आज भी लोग पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
आरोप है कि जल जीवन मिशन के भ्रष्ट अधिकारियों ने हर घर नल के लिए आए करोड़ों रुपए गबन कर इसमें भ्रष्टाचार किए है । ये अधिकारिया तो दिनभर ac में बैठकर गर्मी में ठंडा पानी का मजा ले रहे है और जनता को भीषण गर्मी में एक बूंद पानी के लिए भी तरसने के लिए छोड़ दिए है।
जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार कर अधिकारियों ने अपना जेब भर लिया है पर इन प्यासे लोगों को पानी कौन पिलाएगा? कौन इन बेबस लोगों को भीषण गर्मी में पानी की किल्लत से बचाएगा? क्या जीवन भर इनको ऐसे ही संघर्ष करना पड़ेगा?
यह छत्तीसगढ़ में विष्णु के सुशासन के विफलता को पूरी तरह दिखाता है।



