मलाजखंड में जल क्रांति के नायक बने CMO दिनेश बाघमारे, ‘कैच द रेन’ से बदली शहर की किस्मत

Madhya Bharat Desk
4 Min Read

मलाजखंड। पानी की हर बूंद की कीमत समझते हुए नगर पालिका परिषद मलाजखंड ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो आने वाले वर्षों में इस शहर की तस्वीर ही बदल सकता है। ‘कैच द रेन’ अभियान को जन-आंदोलन में बदलने की पहल कर रहे मुख्य नगर पालिका अधिकारी दिनेश बाघमारे आज जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक नेतृत्व के रूप में उभर रहे हैं।

जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत शहर में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तेजी से स्थापित किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे आम जनता की भागीदारी से जोड़कर एक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जा रहा है।

नगर पालिका परिषद ने अपने सभी आवासीय भवनों और तीन मंजिला कार्यालय भवन को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से लैस कर दिया है। इसके अलावा शहर के दो सामुदायिक भवनों में भी यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। यह दिखाता है कि प्रशासन केवल अपील ही नहीं कर रहा, बल्कि खुद उदाहरण बनकर आगे बढ़ रहा है।

सीएमओ दिनेश बाघमारे लगातार नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि वे अपने घरों में भी जल संरक्षण को अपनाएं। उनका मानना है कि अगर हर घर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए, तो न केवल वर्तमान जल संकट से राहत मिलेगी बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी पानी सुरक्षित रहेगा। उनकी सोच साफ है “हर बूंद की रक्षा, हर घर की जिम्मेदारी।”

इस अभियान का असर भी अब साफ दिखने लगा है। महज 20 दिनों में 75 सरकारी और निजी भवन इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। नगर परिषद कॉलोनी के 30 में से 26 मकानों में यह सिस्टम लगाया जा चुका है, जो तेजी से बढ़ती जागरूकता और प्रशासन की सक्रियता का प्रमाण है।

करीब 7000 भवनों वाले इस शहर में 2000 से अधिक स्थान ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जहां आसानी से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जा सकता है। नगर पालिका ने लक्ष्य रखा है कि आने वाले समय में हर नए निर्माण में इस सिस्टम को अनिवार्य किया जाए और पूरे शहर को जल संरक्षण के मॉडल के रूप में विकसित किया जाए।

इस अभियान की खास बात इसकी सादगी और कम लागत है। विशेषज्ञों के अनुसार केवल 3 से 5 फीट चौड़ा और 5 से 10 फीट गहरा गड्ढा बनाकर, उसमें पत्थर और रेत की परतों के माध्यम से वर्षा जल को जमीन में पहुंचाया जा सकता है। यह तकनीक न केवल सस्ती है बल्कि बेहद प्रभावी भी है।

मलाजखंड, जो अब तक खनिज संपदा के लिए जाना जाता था, अब जल संरक्षण के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बना रहा है। इस बदलाव के पीछे सीएमओ दिनेश बाघमारे की दूरदर्शिता, मेहनत और जनसंपर्क की ताकत साफ नजर आती है।

नगर में दीवारों पर बनाई जा रही आकर्षक वाल पेंटिंग भी इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। रंग-बिरंगे संदेश लोगों को न केवल जल संरक्षण बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक कर रहे हैं।

आज मलाजखंड एक मिसाल बनता दिख रहा है जहां प्रशासन और जनता मिलकर भविष्य के लिए पानी बचाने का संकल्प ले रहे हैं। और इस बदलाव की अगुवाई कर रहे हैं एक ऐसे अधिकारी, जिन्होंने सिर्फ योजना नहीं बनाई, बल्कि उसे जमीन पर उतारकर दिखाया।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment