जगदलपुर।बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक अवसर पर जगदलपुर के लालबाग मैदान में वनोपज और अनाज से बनी 20,700 वर्गफुट की विशाल रंगोली ने सबका ध्यान खींचा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने इस अनोखी कलाकृति का अवलोकन किया। वनोपज से बनी इस रंगोली की विशिष्टता को देखते हुए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने इसे प्रमाणित किया।
वनोपज से उकेरी बस्तर की पहचान
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग द्वारा तैयार कराई गई इस रंगोली में 15 से अधिक वनोपज और अनाजों का उपयोग किया गया। लालबाग मैदान के बड़े हिस्से को कैनवास बनाकर उस पर बस्तर के वन, वनवासी जीवन, जनजातीय संस्कृति और क्षेत्र की विकास यात्रा को आकर्षक आकृतियों के माध्यम से दर्शाया गया।
रंगोली की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें रासायनिक रंगों के बजाय वनवासियों द्वारा एकत्र किए गए वनोपजों को रंग के रूप में इस्तेमाल किया गया। इससे बस्तर की प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समुदायों की सृजनशीलता एक साथ उभरकर सामने आई।

राष्ट्रपति के समक्ष बदलता बस्तर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर को जगदलपुर पहुंचीं। उन्होंने मां दंतेश्वरी से आशीर्वाद लेने के बाद मुरिया दरबार में भाग लिया और फिर लालबाग मैदान में आयोजित सभा को संबोधित किया। बस्तर दशहरा के दौरान देश के प्रथम नागरिक का माई दंतेश्वरी की धरा पर यह पहला आगमन बताया जा रहा है।
वन विभाग ने इस अवसर पर नक्सलवाद के खात्मे के बाद बदलते बस्तर की तस्वीर को भी रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम से पहले लालबाग मैदान में रंगोली और दशहरा प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

वनोपज आजीविका का प्रतीक
यह विशाल रंगोली केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि बस्तर के जनजातीय और वनवासी समुदायों की आजीविका, आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। वनोपज आधारित आजीविका, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग की संभावनाओं को भी इस प्रस्तुति के जरिए रेखांकित किया गया।
बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं, जनजातीय आस्थाओं और सामुदायिक सहभागिता के लिए जाना जाता है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव विभिन्न समुदायों को जोड़ने और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को संरक्षित रखने का प्रतीक माना जाता है।

कार्यक्रम में शामिल रहे गणमान्य
राष्ट्रपति के प्रवास कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद महेश कश्यप तथा जगदलपुर विधायक एवं छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
वनोपज से बनी इस रिकॉर्ड स्तर की रंगोली ने बस्तर की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई। साथ ही यह संदेश भी दिया कि प्रकृति, परंपरा और विकास को साथ लेकर चलकर ही क्षेत्र का समावेशी विकास संभव है।





