शराब घोटाले में 27 हजार पन्नों का चालान! 42 आरोपियों पर शिकंजा

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में ACB और EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 42 आरोपियों के खिलाफ करीब 27 हजार पन्नों का चालान अदालत में पेश किया है। यह मामला साल 2019 से 2023 के बीच शराब की बिक्री, सप्लाई और कमीशन के नाम पर हुए कथित लेन-देन से जुड़ा है।

इसी मामले से जुड़े CSMCL मैनपावर घोटाले में भी जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की है। ACB-EOW ने पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी के संचालक बीआर लोहिया के खिलाफ करीब 500 पन्नों का पूरक चालान कोर्ट में दाखिल किया है।

182.98 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान का आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सरकारी शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर पांच मैनपावर एजेंसियों को नियमों के खिलाफ कुल 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। आरोप है कि कर्मचारियों को ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त दिनों के काम का पैसा देने के बजाय फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए और एजेंसियों को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।

जांच के अनुसार, अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में सेवा शुल्क और अन्य मदों के नाम पर एजेंसियों को 152.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। इनमें ‘ईगल हंटर’ और ‘अलर्ट कमांडोज’ नाम की दो एजेंसियों को 48 करोड़ रुपये से अधिक की रकम मिलने की बात सामने आई है।

कमीशन लेकर अनवर ढेबर तक पहुंचाने का आरोप

जांच एजेंसियों का आरोप है कि बीआर लोहिया के कहने पर फर्जी बिल तैयार किए जाते थे। इसके बदले अधिकारियों को नकद कमीशन दिया जाता था। आरोप है कि अरुणपति त्रिपाठी ने इन एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये तक का कमीशन लिया और इसे अनवर ढेबर तक पहुंचाया।

जांच में यह भी दावा किया गया है कि अवैध कमाई का कुछ हिस्सा अंगड़िया यानी हवाला नेटवर्क के जरिए मुंबई और हैदराबाद भेजा जाता था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले ही त्रिपाठी के हिस्से की करीब 3 करोड़ रुपये की रकम जब्त कर चुका है।

जेल में त्रिपाठी, लोहिया की तलाश जारी

अरुणपति त्रिपाठी फिलहाल रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं, जबकि बीआर लोहिया अभी फरार बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों की कथित संलिप्तता से जुड़े सबूत मिलने के बाद पूरक चालान पेश किया गया है।

फिलहाल मामले की सुनवाई अदालत में जारी है। जांच एजेंसियां इस मामले में अन्य सबूत जुटाने में लगी हैं। इन मामलों में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।

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